सपना Poetry (page 44)

किस के जल्वों ने दिखाई वादी-ए-उल्फ़त मुझे

रऊफ़ यासीन जलाली

तुम भी इस सूखते तालाब का चेहरा देखो

रउफ़ रज़ा

कोई ज़ख़्म खुला तो सहने लगे कोई टीस उठी लहराने लगे

रउफ़ रज़ा

ज़बाँ पे हर्फ़ तो इंकार में नहीं आता

रऊफ़ ख़ैर

दिल दुख न जाए बात कोई बे-सबब न पूछ

रऊफ़ ख़ैर

शौक़ से आए बुरा वक़्त अगर आता है

रसूल साक़ी

खंडर में दफ़्न हुई हैं इमारतें क्या क्या

रासिख़ इरफ़ानी

कभी यूँ भी करो शहर-ए-गुमाँ तक ले चलो मुझ को

राशिद तराज़

ये वाक़िआ तो लगे है सुना हुआ सा कुछ

राशिद जमाल फ़ारूक़ी

सवाल गूँज के चुप हैं जवाब आए नहीं

राशिद जमाल फ़ारूक़ी

प्यारा सा ख़्वाब नींद को छू कर गुज़र गया

राशिद जमाल फ़ारूक़ी

ख़मोश झील में गिर्दाब देख लेते हैं

राशिद जमाल फ़ारूक़ी

यूँ न बेगाना रहो गीत सुनाती है हवा

राशिद अनवर राशिद

वो और लोग थे जो रास्ते बदलते रहे

राशिद अनवर राशिद

सुना कि ख़ूब है उस के दयार का मौसम

राशिद अनवर राशिद

नज़र से दूर रहे मुझ को आज़माए भी

राशिद अनवर राशिद

दस्त-ए-इम्काँ में कोई फूल खिलाया जाए

राशिद अनवर राशिद

शायद

राशिद आज़र

सफ़र

राशिद आज़र

ख़्वाबों के रिश्ते

राशिद आज़र

इंकिशाफ़

राशिद आज़र

अन-चाही मौत

राशिद आज़र

ये बे-नवाई हमारी सौदा-ए-सर है घर में बसा दिया है

राशिद आज़र

अजीब जुम्बिश-ए-लब है ख़िताब भी न करे

राशिद आज़र

इक ख़याल-अफ़रोज़ मौज आई तो थी

राशिदा माहीन मलिक

आँख इम्कान से भरी हुई थी

राशिदा माहीन मलिक

तुझ से वहशत में भी ग़ाफ़िल कब तिरा दीवाना था

रशीद रामपुरी

खुला ये उन के अंदाज़-ए-बयाँ से

रशीद रामपुरी

माना वो एक ख़्वाब था धोका नज़र का था

रशीद क़ैसरानी

माना वो एक ख़्वाब था धोका नज़र का था

रशीद क़ैसरानी

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