विचार Poetry (page 19)

हर क़दम आगही की सम्त गया

सलीम फ़िगार

ये ख़याल अब तो दिल-आज़ार हमारे लिए है

सलीम फ़राज़

न जाने शेर में किस दर्द का हवाला था

सलीम अहमद

ख़ुद अपनी लौ में था मेहराब-ए-जाँ में जलता था

सलीम अहमद

जो आँखों के तक़ाज़े हैं वो नज़्ज़ारे बनाता हूँ

सलीम अहमद

हम हैं और राह-ए-कू-ए-बदनामी

सलीम अहमद

बज़्म आख़िर हुई शम्ओं' का धुआँ बाक़ी है

सलीम अहमद

ज़िंदगी

सलाम मछली शहरी

अस्पताल

सलाम मछली शहरी

तुम्हें मिरे ख़याल की मुसव्विरी क़ुबूल हो

सलाम मछली शहरी

ग़म पर हैं तअ'ना-ज़न तो ख़ुशी भी निभाइए

सलाम मछली शहरी

था ख़्वाब में ख़याल को तुझ से मुआमला

सलाहुद्दीन परवेज़

यही सुनते आए हैं हम-नशीं कभी अहद-ए-शौक़-ए-कमाल में

सज्जाद बाक़र रिज़वी

उसे मैं तलाश कहाँ करूँ वो उरूज है मैं ज़वाल हूँ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

तुझे मैं मिलूँ तो कहाँ मिलूँ मिरा तुझ से रब्त मुहाल है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

सोए हुओं में ख़्वाब से बेदार कौन है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

राहों के ऊँच-नीच ज़रा देख-भाल के

सज्जाद बाक़र रिज़वी

जहाँ में रह के भी हम कब जहाँ में रहते हैं

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हमें चार सम्त की दौड़ में वही गर्द-ए-बाद-ए-सदा मिला

सज्जाद बाक़र रिज़वी

है दुकान-ए-शौक़ भरी हुई कोई मेहरबाँ हो तो ले के आ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

घिरते बादल में तन्हाई कैसी लगती है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दिल दश्त है वफ़ूर-ए-तमन्ना ग़ुबार है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अहद-ए-वफ़ा सुबुक-हवा रंग-ए-वफ़ा के साथ साथ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

इक दर्द सब के दर्द का मज़हर लगा मुझे

सज्जाद बाबर

मैं चाहता हूँ कि हर शय यहाँ सँवर जाए

साजिद हमीद

बर्दाश्त की हदों से मिरा दिल गुज़र गया

साजिद असर

सर-ए-ख़याल मैं जब भूल भी गई कि मैं हूँ

साइमा असमा

तुम्हारे लम्स को ख़ुद मैं उतार सकता हूँ

साइम जी

पहले जो हम चले तो फ़क़त यार तक चले

साइम जी

हम फ़क़ीरों की जेब ख़ाली है

साइम जी

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