भगवान Poetry (page 50)

किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आश्ना नहीं

फ़ना बुलंदशहरी

काफ़िर-ए-इश्क़ को क्या से क्या कर दिया

फ़ना बुलंदशहरी

हुस्न-ए-बुताँ का इश्क़ मेरी जान हो गया

फ़ना बुलंदशहरी

कुछ बात नहीं जिस्म अगर मेरा जला है

फख्र ज़मान

पड़ गया है ख़ुदा से काम मुझे

फ़ैज़ी

इस लिए दिल बुरा किया ही नहीं

फ़ैज़ी

जब तक मिज़ाज-ए-दोस्त में कुछ बरहमी रही

फ़ैज़ुल हसन

वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

व-यबक़ा-वज्ह-ओ-रब्बिक

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तीन आवाज़ें

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम तो मजबूर-ए-वफ़ा हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गाँव की सड़क

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुआ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दरीचा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दाग़िस्तानी ख़ातून और शाएर बेटा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हैराँ है जबीं आज किधर सज्दा रवा है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हिमाला की दासियाँ

फ़ैसल सईद फ़ैसल

ये तीरा-बख़्त बयानों में क़ैद रहते हैं

फ़ैसल सईद फ़ैसल

इश्क़ की आज इंतिहा कर दो

फ़ैसल फेहमी

जिसे कल रात भर पूजा गया था

फ़ैसल अज़ीम

अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है

फ़ैसल अजमी

ये भी नहीं कि दस्त-ए-दुआ तक नहीं गया

फ़ैसल अजमी

मैं ज़ख़्म खा के गिरा था कि थाम उस ने लिया

फ़ैसल अजमी

अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है

फ़ैसल अजमी

नज़्र-ए-फ़िराक़

फ़हमीदा रियाज़

जाप

फ़हमीदा रियाज़

बाकिरा

फ़हमीदा रियाज़

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