भगवान Poetry (page 52)

औरत को चाहिए कि अदालत का रुख़ करे

दिलावर फ़िगार

शदीद गरमी के मौसम में मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

मौसीक़ी से इलाज

दिलावर फ़िगार

कराची की बस

दिलावर फ़िगार

इलिएट्स-गर्ल्स-कॉलेज और कुल पाक ओ हिन्द मुशाएरा

दिलावर फ़िगार

या रब मिरे नसीब में अक्ल-ए-हलाल हो

दिलावर फ़िगार

'आज़र' रहा है तेशा मिरे ख़ानदान में

दिलावर अली आज़र

रह गया ख़्वाब-ए-दिल-आराम अधूरा किस का

दिल अय्यूबी

कुछ नहीं खुलता इब्तिदा क्या है

दीद राही

ज़िंदगी क्या है इब्तिला के सिवा

द्वारका दास शोला

मेरी मंज़िल कहाँ है क्या मा'लूम

द्वारका दास शोला

इंसाँ ब-यक निगाह बुरा भी भला भी है

द्वारका दास शोला

दिल-ए-बे-मुद्दआ का मुद्दआ' क्या

द्वारका दास शोला

देख जुर्म-ओ-सज़ा की बात न कर

द्वारका दास शोला

अपनों के सितम याद न ग़ैरों की जफ़ा याद

द्वारका दास शोला

अपनी बेचारगी पे रो न सके

द्वारका दास शोला

दैर ओ काबा में भटकते फिर रहे हैं रात दिन

दत्तात्रिया कैफ़ी

क़िस्मत बुरे किसी के न इस तरह लाए दिन

दत्तात्रिया कैफ़ी

हुस्न-ए-अज़ल का जल्वा हमारी नज़र में है

दत्तात्रिया कैफ़ी

ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

सामने जो कहा नहीं होता

दरवेश भारती

तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है

दर्शन सिंह

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला

दर्शन सिंह

जब आदमी मुद्दआ-ए-हक़ है तो क्या कहें मुद्दआ' कहाँ है

दर्शन सिंह

बहुत मुश्किल है तर्क-ए-आरज़ू रब्त-आश्ना हो कर

दर्शन सिंह

आज दिल से दुआ करे कोई

दर्शन सिंह

ग़ाफ़िल ख़ुदा की याद पे मत भूल ज़ीनहार

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तेरी गली में मैं न चलूँ और सबा चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

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