भगवान Poetry (page 53)

जग में कोई न टुक हँसा होगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

चश्म-ए-वा ही न हुई जल्वा-नुमा क्या होता

दानियाल तरीर

दिल था बे-कैफ़ मोहब्बत की ख़ता से पहले

दानिश फ़राही

मुअज़्ज़िन ने शब-ए-वस्ल अज़ाँ पिछले पहर

दाग़ देहलवी

ख़ुदा की क़सम उस ने खाई जो आज

दाग़ देहलवी

दिल ही तो है न आए क्यूँ दम ही तो है न जाए क्यूँ

दाग़ देहलवी

दी शब-ए-वस्ल मोअज़्ज़िन ने अज़ाँ पिछली रात

दाग़ देहलवी

'दाग़' को कौन देने वाला था

दाग़ देहलवी

बड़ा मज़ा हो जो महशर में हम करें शिकवा

दाग़ देहलवी

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद

दाग़ देहलवी

उस के दर तक किसे रसाई है

दाग़ देहलवी

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-उल्फ़त कभी न करना

दाग़ देहलवी

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

दाग़ देहलवी

ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा

दाग़ देहलवी

कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया

दाग़ देहलवी

इस नहीं का कोई इलाज नहीं

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाएँ हम

दाग़ देहलवी

दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने

दाग़ देहलवी

देख कर जौबन तिरा किस किस को हैरानी हुई

दाग़ देहलवी

डरते हैं चश्म ओ ज़ुल्फ़ ओ निगाह ओ अदा से हम

दाग़ देहलवी

भला हो पीर-ए-मुग़ाँ का इधर निगाह मिले

दाग़ देहलवी

अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का

दाग़ देहलवी

अब वो ये कह रहे हैं मिरी मान जाइए

दाग़ देहलवी

आरज़ू है वफ़ा करे कोई

दाग़ देहलवी

दिन तो शिकम की आग बुझाने में जाए है

दाएम ग़व्वासी

चेहरे पे नूर-ए-सुब्ह सियह गेसुओं में रात

दाएम ग़व्वासी

किसी ने बा-वफ़ा समझा किसी ने बेवफ़ा समझा

डी. राज कँवल

बी.टी-नामा

कर्नल मोहम्मद ख़ान

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