मौसम Poetry (page 8)

सय्याल तसव्वुर है उबलने की तरह का

शमीम क़ासमी

नया लहजा ग़ज़ल का मिस्रा-ए-सानी में रक्खा है

शमीम क़ासमी

वो दिल भी जलाते हैं रख देते हैं मरहम भी

शमीम करहानी

रहम ऐ ग़म-ए-जानाँ बात आ गई याँ तक

शमीम जयपुरी

सूरज धीरे धीरे पिघला फिर तारों में ढलने लगा

शमीम हनफ़ी

बहुत घुटन है बहुत इज़्तिराब है मौला

शमीम फ़ारूक़ी

आसमाँ का रंग मेरी ज़ात में घुल जाएगा

शमीम फ़ारूक़ी

निगाह ओ दिल के तमाम रिश्ते फ़ज़ा-ए-आलम से कट गए हैं

शकील जाज़िब

जुज़-निहालआरज़ू सीने में क्या रखता हूँ मैं

शकील जाज़िब

आवाज़ों के जाल बिछाए जाते हैं

शकील ग्वालिआरी

तुझ को सोचों तो तिरे जिस्म की ख़ुशबू आए

शकील आज़मी

संग थे पिघले तो पानी हो गए

शकील आज़मी

कुछ इस तरह से मिलें हम कि बात रह जाए

शकील आज़मी

चाँद में ढलने सितारों में निकलने के लिए

शकील आज़मी

जिस दम क़फ़स में मौसम-ए-गुल की ख़बर गई

शकेब जलाली

दिल के वीराने में इक फूल खिला रहता है

शकेब जलाली

दर्द के मौसम का क्या होगा असर अंजान पर

शकेब जलाली

हवस-ए-वक़्त का अंदाज़ा लगाया जाए

शकेब अयाज़

दाइमी सुख

शाइस्ता मुफ़्ती

अजनबी शहर में उल्फ़त की नज़र को तरसे

शाइस्ता मुफ़्ती

ज़िंदगी को हम वफ़ा तक वो जफ़ा तक ले गए

शहज़ाद क़मर

अपने रोज़ ओ शब का आलम कर्बला से कम नहीं

शहज़ाद क़मर

रात के वक़्त कोई गीत सुनाती है हवा

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

आँख-मिचोली

शहज़ाद अहमद

सब्त है चेहरों पे चुप बन में अंधेरा हो चुका

शहज़ाद अहमद

ख़िज़ाँ जब आए तो आँखों में ख़ाक डालता हूँ

शहज़ाद अहमद

कमरों में छुपने के दिन हैं और न बरहना रातें हैं

शहज़ाद अहमद

कैसे गुज़र सकेंगे ज़माने बहार के

शहज़ाद अहमद

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