नज़र Poetry (page 16)

जिस को आदत वस्ल की हो हिज्र से क्यूँकर बने

रशीद लखनवी

जब से सुना दहन तिरे ऐ माह-रू नहीं

रशीद लखनवी

अगर गुल की कोई पती झड़ी है

रशीद लखनवी

गए दिनों की मुसाफ़िरत का ब-यक-क़लम इश्तिहार लिखना

रशीद एजाज़

आँखों में ज़िंदगी के तमाशे उछाल कर

रशीद एजाज़

ख़्वाब उस के हैं जो चुरा ले जाए

रसा चुग़ताई

ख़्वाब उस के हैं जो चुरा ले जाए

रसा चुग़ताई

हुस्न-ए-बज़्म-ए-मिसाल में क्या है

रसा चुग़ताई

उस के कूचे में बहुत रहते हैं दीवाने पड़े

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

निगाह तूर पे है और जमाल सीने में

रम्ज़ अज़ीमाबादी

रक़्स-ए-शबाब-ओ-रंग-ए-बहाराँ नज़र में है

राम कृष्ण मुज़्तर

मिरी निगाह में ये रंग-ए-सोज़-ओ-साज़ न हो

राम कृष्ण मुज़्तर

मेरे तसव्वुरात में अब कोई दूसरा नहीं

राम कृष्ण मुज़्तर

मजबूर तो बहुत हैं मोहब्बत में जी से हम

राम कृष्ण मुज़्तर

गर्दिश-ए-जाम भी है रक़्स भी है साज़ भी है

राम कृष्ण मुज़्तर

दिल-ओ-नज़र में न पैदा हुई शकेबाई

राम कृष्ण मुज़्तर

दर्द-ए-हयात-ए-इश्क़ है नग़्मा-ए-जाँ-गुदाज़ में

राम कृष्ण मुज़्तर

न क़ाएल होते हैं न ज़ाइल

राजेन्द्र मनचंदा बानी

न जाने कल हों कहाँ साथ अब हवा के हैं

राजेन्द्र मनचंदा बानी

आज तो रोने को जी हो जैसे

राजेन्द्र मनचंदा बानी

क्या क्या सवाल मेरी नज़र पूछती रही

राजेन्द्र नाथ रहबर

मियाँ के दोस्त

राजा मेहदी अली ख़ाँ

क्या बात है कि बात ही दिल की अदा न हो

राज नारायण राज़

ज़ौक़-ए-सुजूद ले गया मुझ को कहाँ कहाँ

राज कुमार सूरी नदीम

नख़्ल-ए-उमीद-ओ-आरज़ू बे-बर्ग-ओ-बार है

राज कुमार सूरी नदीम

जब तक मुझे नसीब तिरी दोस्ती रही

राज कुमार सूरी नदीम

परेशाँ करने वालों को परेशाँ कौन देखेगा

रहमत इलाही बर्क़ आज़मी

यास-ओ-हिरास-ओ-जौर-ओ-जफ़ा से अलग-थलग

राही फ़िदाई

हर बात जो न होना थी ऐसी हुई कि बस

इक़बाल उमर

असीरों में भी हो जाएँ जो कुछ आशुफ़्ता-सर पैदा

इक़बाल सुहैल

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