सबसे Poetry (page 29)

नीले पीले सियाह सुर्ख़ सफ़ेद सब थे शामिल इसी तमाशे में

शमीम हनफ़ी

लक़ड़हारे तुम्हारे खेल अब अच्छे नहीं लगते

शमीम हनफ़ी

कई रातों से बस इक शोर सा कुछ सर में रहता है

शमीम हनफ़ी

कभी सहरा में रहते हैं कभी पानी में रहते हैं

शमीम हनफ़ी

हर नक़्श-ए-नवा लौट के जाने के लिए था

शमीम हनफ़ी

ऐसे कई सवाल हैं जिन का जवाब कुछ नहीं

शमीम हनफ़ी

मिरे हाथ की सब दुआ ले गया

शमीम फ़ारूक़ी

डूबते सूरज का मंज़र वो सुहानी कश्तियाँ

शमीम फ़ारूक़ी

बहुत घुटन है बहुत इज़्तिराब है मौला

शमीम फ़ारूक़ी

निराला अजब नक-चढ़ा आदमी हूँ

शमीम अब्बास

नज़र समेटें बटोर कर इंतिज़ार रख दें

शमीम अब्बास

बड़ी सर्द रात थी कल मगर बड़ी आँच थी बड़ा ताव था

शमीम अब्बास

अहम आँखें हैं या मंज़र खुले तो

शमीम अब्बास

फूल से लोगों को मिट्टी में मिला कर आएगी

शकील सरोश

जाँ के ज़ियाँ को ग़म की तलाफ़ी समझ लिया

शकील जाज़िब

तुम शुजाअ'त के कहाँ क़िस्से सुनाने लग गए

शकील जमाली

थोड़ा सा माहौल बनाना होता है

शकील जमाली

सारे भूले बिसरों की याद आती है

शकील जमाली

पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं

शकील जमाली

किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है

शकील जमाली

कहानी में छोटा सा किरदार है

शकील जमाली

इक आस का दिया तो दिल में जलाते जाओ

शकील ग्वालिआरी

आवाज़ों के जाल बिछाए जाते हैं

शकील ग्वालिआरी

ज़लज़ला

शकील बदायुनी

ये दुनिया है यहाँ दिल को लगाना किस को आता है

शकील बदायुनी

वो हम से दूर होते जा रहे हैं

शकील बदायुनी

तस्वीर बनाता हूँ तिरी ख़ून-ए-जिगर से

शकील बदायुनी

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

मुझ को साक़ी ने जो रुख़्सत किया मय-ख़ाने से

शकील बदायुनी

करने दो अगर क़त्ताल-ए-जहाँ तलवार की बातें करते हैं

शकील बदायुनी

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