सबसे Poetry (page 28)

कभी ख़ुद को छूकर नहीं देखता हूँ

शारिक़ कैफ़ी

गुज़र रहा है वो लम्हा तो याद आया है

शारिक़ कैफ़ी

दिलों पर नक़्श होना चाहता हूँ

शारिक़ कैफ़ी

अजब शिकस्त का एहसास दिल पे छाया था

शारिक़ कैफ़ी

आइने का साथ प्यारा था कभी

शारिक़ कैफ़ी

पर्दा-ए-रुख़ क्या उठा हर-सू उजाले हो गए

शारिब मौरान्वी

हवा के दोश पे बादल की मुश्क ख़ाली है

शारिब मौरान्वी

हमारे जिस्म के अंदर भी कोई रहता है

शारिब मौरान्वी

कुछ भी हो उस से जुदाई का सबब घर जाओ

शरीफ़ अहमद शरीफ़

ज़र्फ़ तो देखिए मेरे दिल-ए-शैदाई का

शरफ़ मुजद्दिदी

बाद-ए-सरसर की करामात से पहले क्या था

शनावर इस्हाक़

बयान सफ़ाई

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

बैत-ए-अंकबूत

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

अँधेरी शब से एक ला-हासिल

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

आख़िरी तमाशाई

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

इधर से देखें तो अपना मकान लगता है

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

देखिए बे-बदनी कौन कहेगा क़ातिल है

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

यूँ ब-ज़ाहिर देखे तो यार सब

शम्स तबरेज़ी

उर्दू

शम्स रम्ज़ी

जब तक तुझ को मौत न आए कर ले रैन-बसेरा बाबा

शम्स रम्ज़ी

मंज़िल-ए-इश्क़ के राहबर खो गए

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

बिछड़ते टूटते रिश्तों को हम ने देखा था

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

नया लहजा ग़ज़ल का मिस्रा-ए-सानी में रक्खा है

शमीम क़ासमी

समझे है मफ़्हूम नज़र का दिल का इशारा जाने है

शमीम करहानी

अनमोल सही नायाब सही बे-दाम-ओ-दिरम बिक जाते हैं

शमीम करहानी

रहम ऐ ग़म-ए-जानाँ बात आ गई याँ तक

शमीम जयपुरी

इस इल्तिफ़ात पर कोई दामन न थाम ले

शमीम जयपुरी

चाहा बयाँ करूँ जों है मेरे ख़याल में

शमीम हाश्मी

तिलिस्म है कि तमाशा है काएनात उस की

शमीम हनफ़ी

शोला शोला थी हवा शीशा-ए-शब से पूछो

शमीम हनफ़ी

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