सबसे Poetry (page 35)

हाशिए पर कुछ हक़ीक़त कुछ फ़साना ख़्वाब का

शाहिद माहुली

ग़म की तहज़ीब अज़िय्यत का क़रीना सीखें

शाहिद माहुली

ग़म की तहज़ीब अज़िय्यत का क़रीना सीखें

शाहिद माहुली

ज़मीं तश्कील दे लेते फ़लक ता'मीर कर लेते

शाहिद लतीफ़

लोग हैरान हैं हम क्यूँ ये किया करते हैं

शाहिद लतीफ़

कोई लहजा कोई जुमला कोई चेहरा निकल आया

शाहिद लतीफ़

ज़ख़्म-ए-जिगर को दस्त-ए-जराहत से पूछिए

शाहिद कमाल

ये ज़रूरत है तो फिर इस को ज़रूरत से न देख

शाहिद कमाल

कूचा-ए-संग-ए-मलामत के सब आसार के साथ

शाहिद कमाल

जो इस चमन में ये गुल सर्व-ओ-यासमन के हैं

शाहिद कमाल

अपनी तन्हाई का सामान उठा लाए हैं

शाहिद कमाल

पाया नहीं वो जो खो रहा हूँ

शाहिद कबीर

नुक़ूश-ए-रहगुज़र-ए-शौक़ सब मिटा देना

शाहिद इश्क़ी

किस किस के आँसू पूछोगे और किस किस को बहलाओगे

शाहिद इश्क़ी

इक न आने वाले का इंतिज़ार करते हैं

शाहिद इश्क़ी

दिए हैं रंज सारे आगही ने

शाहिद इश्क़ी

मेरे दिल में घर भी बनाता रहता है

शाहिद ग़ाज़ी

लगता है जिस का रुख़-ए-ज़ेबा मह-ए-कामिल मुझे

शाहिद ग़ाज़ी

हम दोनों ने नाम लिखा था साहिल पर

शाहिद फ़रीद

गुलाब-ब-कफ़

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

यूँ उलझ कर रह गई है तार-ए-पैराहन में रात

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

सच का लम्हा जब भी नाज़िल होता है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दिन छोटा है रात बड़ी है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

अहल-ए-दुनिया के लिए ये माजरा है मुख़्तलिफ़

शाहीन बद्र

कुछ नहीं लिक्खा हुआ फिर भी पढ़ा जाता है क्या

शाहीन अब्बास

कुछ भी न जब दिखाई दे तब देखता हूँ मैं

शाहीन अब्बास

ख़्वाब खुलना है जो आँखों पे वो कब खुलता है

शाहीन अब्बास

कैसा कैसा दर पस-ए-दीवार करना पड़ गया

शाहीन अब्बास

बनते बनते अपने पेच-ओ-ख़म बने

शाहीन अब्बास

सूरज का शहर

शहाब जाफ़री

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