यात्रा Poetry (page 56)

दरीचों में चराग़ों की कमी महसूस होती है

अज़हर अदीब

हवा-ए-तेज़ के आगे कहाँ रहेगा कोई

अज़हर अब्बास

ऐसे पामाल कि पहचान में आते ही नहीं

अज़हर अब्बास

लाई न सबा बू-ए-चमन अब के बरस भी

अज़ीम मुर्तज़ा

जब से है वो रौनक़-ए-महफ़िल आँखों में

अज़ीम मुर्तज़ा

सरहद-ए-जिस्म से बाहर कहीं घर लिक्खा था

आज़ाद गुलाटी

सरहद-ए-जिस्म से बाहर कहीं घर लिक्खा था

आज़ाद गुलाटी

किस ने सदा दी कौन आया है

आज़ाद गुलाटी

बहुत लम्बा सफ़र तपती सुलगती ख़्वाहिशों का था

आज़ाद गुलाटी

अपनी सारी काविशों को राएगाँ मैं ने किया

आज़ाद गुलाटी

न पूछो कौन हैं क्यूँ राह में नाचार बैठे हैं

आज़ाद अंसारी

डराने वाला सुन कर डर रहा है

आयुष चराग़

कोई न देखे गूँज हवा की

अय्यूब ख़ावर

घर दरवाज़े से दूरी पर सात समुंदर बीच

अय्यूब ख़ावर

अब तो आए नज़र में जो भी हो

अय्यूब ख़ावर

पूछते हैं तुझ को सफ़्फ़ाकी कहाँ रह कर मिली

औरंगज़ेब

नाव तूफ़ान में जब ज़ेर-ओ-ज़बर होती है

औलाद अली रिज़वी

इस गली से उस गली तक दौड़ता रहता हूँ मैं

अतीक़ुल्लाह

कीसा-ए-दरवेश में जो भी है ज़र उतना ही है

अतीक़ुल्लाह

चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे

अतीक़ुल्लाह

वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी

आतिफ़ ख़ान

मोहब्बतें भी लिखी हुई हैं अदावतें भी लिखी हुई हैं

अतहर सलीमी

ख़ुद को किसी की राह-गुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

ख़ुद को किसी की राहगुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

अगर यक़ीन न रखते गुमान तो रखते

अतहर नासिक

वो दौर क़रीब आ रहा है

अतहर नफ़ीस

दम-ब-दम बढ़ रही है ये कैसी सदा शहर वालो सुनो

अतहर नफ़ीस

'अतहर' तुम ने इश्क़ किया कुछ तुम भी कहो क्या हाल हुआ

अतहर नफ़ीस

मोहब्बत की मंज़िल

अतीया दाऊद

शजर से मिल के जो रोने लगा था

अतीक़ अहमद

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