अधिक Poetry (page 6)

मुद्दत हुई पलक से पलक आश्ना नहीं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो कोई कि यार-ओ-आश्ना है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

होवे वो शोख़-चश्म अगर मुझ से चार चश्म

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

एक तो तिरी दौलत था ही दिल ये सौदाई

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कौन कहता है कि दरिया में रवानी कम है

शहज़ाद अहमद

इस भरे शहर में आराम मैं कैसे पाऊँ

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

अब जिधर देखिए लगता है कि इस दुनिया में

शहरयार

खेल का नतीजा

शहरयार

एक और साल गिरह

शहरयार

ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो' थी नहीं कुछ कम है

शहरयार

इनायत है तिरी बस एक एहसान और इतना कर

शहराम सर्मदी

फ़न के शजर पर फल जो लगे हैं

शहूद आलम आफ़ाक़ी

सारे पत्थर और आईने एक से लगते हैं

शाहिदा हसन

मैं अपने हिस्से की तन्हाई महफ़िल से निकालूँगा

शाहिद ज़की

अपने हमराह मोहब्बत के हवाले रखना

शाहिद फ़रीद

मोहब्बत में न जाने क्यूँ हमें फ़ुर्सत ज़ियादा है

शाहीन अब्बास

बोसा-ए-ख़ाल-ए-लब-ए-जानाँ की कैफ़िय्यत न पूछ

शाह नसीर

ये इश्क़ भी अजीब है इक आन हो गया

शफ़क़ सुपुरी

जवानी से ज़ियादा वक़्त-ए-पीरी जोश होता है

शाद लखनवी

ज़रा देखना ख़ाकसारी हमारी

शाद लखनवी

वक़्त-ए-तज़ईं जो दिखाए वो सफ़ा सीने को

शाद लखनवी

सामने इक बे-रहम हक़ीक़त नंगी हो कर नाचती है

शबनम शकील

आईन-ए-वफ़ा इतना भी सादा नहीं होता

शबनम शकील

नज़्म

शबनम अशाई

नज़्म

शबनम अशाई

ग़म मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे

सीमाब अकबराबादी

वीरानियों के ख़ार तो फूलों की छुवन भी

सौरभ शेखर

एक रौज़न के अभी किरदार में हूँ मैं

सौरभ शेखर

कहते हैं लोग यार का अबरू फड़क गया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

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