विद्वान Poetry (page 35)

निगाह-ए-क़हर होगी या मोहब्बत की नज़र होगी

बिस्मिल अज़ीमाबादी

याद आता है समाँ मुझ को ख़ुद-आराई का

बिस्मिल इलाहाबादी

उन से कह दो कि इलाज-ए-दिल-ए-शैदा न करें

बिस्मिल इलाहाबादी

साज़-ए-हस्ती का अजब जोश नज़र आता है

बिस्मिल इलाहाबादी

जो न करना था किया जो कुछ न होना था हुआ

बिस्मिल इलाहाबादी

हर सम्त है वीरानी सी वीरानी का आलम

बिस्मिल आग़ाई

सब उम्र तो जारी नहीं रहता है सफ़र भी

बिस्मिल आग़ाई

एक आलम है ये हैरानी का जीना कैसा

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

बाल बिखेरे आज परी तुर्बत पर मेरे आएगी

भारतेंदु हरिश्चंद्र

आ गई सर पर क़ज़ा लो सारा सामाँ रह गया

भारतेंदु हरिश्चंद्र

ख़ुदा रक्खे तुझे मेरी बुराई देखने वाले

बेख़ुद देहलवी

उन की हसरत भी नहीं मैं भी नहीं दिल भी नहीं

बेखुद बदायुनी

तो पहले मेरा ही हाल-ए-तबाह लिख लीजे

बेकल उत्साही

तमन्ना बन गई है माया-ए-इल्ज़ाम क्या होगा

बेकल उत्साही

जब कूचा-ए-क़ातिल में हम लाए गए होंगे

बेकल उत्साही

यूँ तो जो चाहे यहाँ साहब-ए-महफ़िल हो जाए

बहज़ाद लखनवी

क्या ये भी मैं बतला दूँ तू कौन है मैं क्या हूँ

बहज़ाद लखनवी

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ

बहज़ाद लखनवी

फ़रियाद है अब लब पर जब अश्क-फ़िशानी थी

बहज़ाद लखनवी

जिस की इस आलम-ए-सूरत में है रंग-आमेज़ी

बेदम शाह वारसी

ये साक़ी की करामत है कि फ़ैज़-ए-मय-परस्ती है

बेदम शाह वारसी

सहारा मौजों का ले ले के बढ़ रहा हूँ मैं

बेदम शाह वारसी

क़फ़स की तीलियों से ले के शाख़-ए-आशियाँ तक है

बेदम शाह वारसी

न मेहराब-ए-हरम समझे न जाने ताक़-ए-बुत-ख़ाना

बेदम शाह वारसी

मैं यार का जल्वा हूँ

बेदम शाह वारसी

खींची है तसव्वुर में तस्वीर-ए-हम-आग़ोशी

बेदम शाह वारसी

इश्क़ के आसार हैं फिर ग़श मुझे आया देखो

बेदम शाह वारसी

हलाक-ए-तेग़-ए-जफ़ा या शहीद-ए-नाज़ करे

बेदम शाह वारसी

अल्लाह-रे फ़ैज़ एक जहाँ मुस्तफ़ीद है

बेदम शाह वारसी

रक़्क़ासा-ए-औहाम

बेबाक भोजपुरी

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