बात Poetry (page 63)

ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा

हफ़ीज़ जालंधरी

निगाह-ए-आरज़ू-आमोज़ का चर्चा न हो जाए

हफ़ीज़ जालंधरी

मस्तों पे उँगलियाँ न उठाओ बहार में

हफ़ीज़ जालंधरी

कम-बख़्त दिल बुरा हुआ तिरी आह आह का

हफ़ीज़ जालंधरी

जल्वा-ए-हुस्न को महरूम-ए-तमाशाई कर

हफ़ीज़ जालंधरी

इश्क़ में छेड़ हुई दीदा-ए-तर से पहले

हफ़ीज़ जालंधरी

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके

हफ़ीज़ जालंधरी

हैरान न हो देख मैं क्या देख रहा हूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल से तिरा ख़याल न जाए तो क्या करूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल को वीराना कहोगे मुझे मालूम न था

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल अभी तक जवान है प्यारे

हफ़ीज़ जालंधरी

अर्ज़-ए-हुनर भी वज्ह-ए-शिकायात हो गई

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल से आती है बात लब पे 'हफ़ीज़'

हफ़ीज़ होशियारपुरी

रौशनी सी कभी कभी दिल में

हफ़ीज़ होशियारपुरी

राज़-ए-सर-बस्ता मोहब्बत के ज़बाँ तक पहुँचे

हफ़ीज़ होशियारपुरी

न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू

हफ़ीज़ होशियारपुरी

मन-ओ-तू का हिजाब उठने न दे ऐ जान-ए-यकताई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

वो बात 'हफ़ीज़' अब नहीं मिलती किसी शय में

हफ़ीज़ बनारसी

ये कैसी हवा-ए-ग़म-ओ-आज़ार चली है

हफ़ीज़ बनारसी

ये और बात कि लहजा उदास रखते हैं

हफ़ीज़ बनारसी

वो तो बैठे रहे सर झुकाए हुए

हफ़ीज़ बनारसी

लहू की मय बनाई दिल का पैमाना बना डाला

हफ़ीज़ बनारसी

लब-ए-फ़ुरात वही तिश्नगी का मंज़र है

हफ़ीज़ बनारसी

कुछ सोच के परवाना महफ़िल में जला होगा

हफ़ीज़ बनारसी

ख़फ़ा है गर ये ख़ुदाई तो फ़िक्र ही क्या है

हफ़ीज़ बनारसी

जब भी तिरी यादों की चलने लगी पुर्वाई

हफ़ीज़ बनारसी

वापसी

हबीब तनवीर

तुम्हारे गाँव से जो रास्ता निकलता है

हबीब तनवीर

ये और बात तेरी गली में न आएँ हम

हबीब जालिब

तुम्हें तो नाज़ बहुत दोस्तों पे था 'जालिब'

हबीब जालिब

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