चेहरा Poetry (page 23)

पत्ता हूँ आँधियों के मुक़ाबिल खड़ा हूँ मैं

अज़हर अदीब

अपना जैसा भी हाल रक्खा है

अज़हर अदीब

रौशनी फैली तो सब का रंग काला हो गया

आज़ाद गुलाटी

सात सुरों का बहता दरिया तेरे नाम

अय्यूब ख़ावर

हम चाहते थे माह-ए-दरख़्शाँ को देखना

आएशा मसूद मलिक

उस ने हमारे हाथ में इक हाथ क्या दिया

आएशा मसूद मलिक

अश्क को दरिया बनाया आँख को साहिल किया

औरंगज़ेब

आइना है ख़याल की हैरत

औरंगज़ेब

वो जो सर्फ़-ए-निगाह करता है

अतीक़ुल्लाह

वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी

आतिफ़ ख़ान

पहुँचा दिया उमीद को तूफ़ान-ए-यास तक

अतहर नासिक

ख़्वाबों के उफ़ुक़ पर तिरा चेहरा हो हमेशा

अतहर नफ़ीस

सौ रंग है किस रंग से तस्वीर बनाऊँ

अतहर नफ़ीस

'अतहर' तुम ने इश्क़ किया कुछ तुम भी कहो क्या हाल हुआ

अतहर नफ़ीस

भरोसे का क़त्ल

अतीया दाऊद

गुज़िश्ता रात कोई चाँद घर में उतरा था

अतीक़ अंज़र

दिल के आँगन में तिरी याद का तारा चमका

अतीक़ अंज़र

तीरगी शम्अ बनी राहगुज़र में आई

अता आबिदी

पस-ए-दीवार हुज्जत किस लिए है

अता आबिदी

वतन-आशोब

असरार-उल-हक़ मजाज़

नूरा

असरार-उल-हक़ मजाज़

जानते थे ग़म तिरा दरिया भी था गहरा भी था

असरारुल हक़ असरार

अनजाने लोगों को हर सू चलता फिरता देख रहा हूँ

असरार ज़ैदी

मिरे क़दमों में दुनिया के ख़ज़ाने हैं उठा लूँ क्या

असलम राशिद

सफ़र से पहले सराबों का सिलसिला रख आए

असलम महमूद

जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया

असलम कोलसरी

दयार-ए-हिज्र में ख़ुद को तो अक्सर भूल जाता हूँ

असलम कोलसरी

कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता

असलम अंसारी

ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था

असलम अंसारी

हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे

असलम अंसारी

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