देख Poetry (page 72)

ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो

अमीर मीनाई

एक उसी को देख न पाए वर्ना शहर की सड़कों पर

अमीक़ हनफ़ी

तज्दीद

अमीक़ हनफ़ी

परेशानी-ए-दीद

अमीक़ हनफ़ी

दुआ

अमीक़ हनफ़ी

मैं भी कब से चुप बैठा हूँ वो भी कब से चुप बैठी है

अमीक़ हनफ़ी

बीन हवा के हाथों में है लहरे जादू वाले हैं

अमीक़ हनफ़ी

तीरगी ही तीरगी है बाम-ओ-दर में कौन है

अमीन राहत चुग़ताई

मैं तिरी दस्तरस से बहुत दूर था

अमीन राहत चुग़ताई

क्या बताएँ कहाँ कहाँ थे फूल

अमीन राहत चुग़ताई

जो दुहाई दे रहा है कोई सौदाई न हो

अमीन राहत चुग़ताई

तुझ को तिरी ही आँख से देख रही है काएनात

अमीन हज़ीं

लाले पड़े हैं जान के जीने का एहतिमाम कर

अमीन हज़ीं

अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहा हूँ मैं

अमीन हज़ीं

क़िस्सा-ए-ख़ाक तो कुछ ख़ाक से आगे तक था

अमीन अडीराई

तिरी निगाह बनी आइना मिरी ख़ातिर

अम्बर वसीम इलाहाबादी

हैराँ मैं पहली बार हुआ ज़िंदगी में कल

अम्बर वसीम इलाहाबादी

आईना देख कर न तो शीशे को देख कर

अम्बर वसीम इलाहाबादी

खिड़की

अम्बरीन सलाहुद्दीन

सितारा-बार बन जाए नज़र ऐसा नहीं होता

अंबरीन हसीब अंबर

मैं उसे देख रही हूँ बड़ी हैरानी से

अंबरीन हसीब अंबर

ध्यान में आ कर बैठ गए हो तुम भी नाँ

अंबरीन हसीब अंबर

इम्बिसात-ए-अज़ली

अम्बर बहराईची

धनक

अम्बर बहराईची

हर लम्हा सैराबी की अर्ज़ानी है

अम्बर बहराईची

किसे ख़याल कि इशरत के बाब कितने हैं

अमर सिंह फ़िगार

बैठा है सोगवार सितमगर के शहर में

अमर सिंह फ़िगार

रूह को राह-ए-अदम में मिरा तन याद आया

अमानत लखनवी

लुत्फ़ अब ज़ीस्त का ऐ गर्दिश-ए-अय्याम नहीं

अमानत लखनवी

ख़ाना-ए-ज़ंजीर का पाबंद रहता हूँ सदा

अमानत लखनवी

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