दिल Poetry (page 214)

फ़िक्र पाबंदी-ए-हालात से आगे न बढ़ी

हमीद नागपुरी

कभी तो रंग-ए-हुस्न-ए-यार देखूँ

हमीद कौसर

सीने में राज़-ए-इश्क़ छुपाया न जाएगा

हमीद जालंधरी

किस वहम में असीर तिरे मुब्तला हुए

हमीद जालंधरी

कैसा ग़ज़ब ये ऐ दिल-ए-पुर-जोश कर दिया

हमीद जालंधरी

ऐ दोस्त दर्द-ए-दिल का मुदावा किया न जाए

हमीद जालंधरी

आ के वो मुझ ख़स्ता-जाँ पर यूँ करम फ़रमा गया

हमीद जालंधरी

शहर-ए-आरज़ू

हमीद अलमास

उस के करम से है न तुम्हारी नज़र से है

हमीद अलमास

फिर किसी याद का दरवाज़ा खुला आहिस्ता

हमीद अलमास

हर्फ़-ए-ग़ज़ल से रंग-ए-तमन्ना भी छीन ले

हमीद अलमास

ज़बाँ के साथ यहाँ ज़ाइक़ा भी रक्खा है

हमदम कशमीरी

छटी है राह से गर्द-ए-मलाल मेरे लिए

हमदम कशमीरी

मौसम-ए-हिज्र के आने के शिकायत नहीं की

हलीम कुरेशी

वो सर ही क्या कि जिस में तुम्हारा न हो ख़याल

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

तअस्सुब बर-तरफ़ मस्जिद हो या हो कू-ए-बुत-ख़ाना

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

दर्द को रहने भी दे दिल में दवा हो जाएगी

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

मरता भला है ज़ब्त की ताक़त अगर न हो

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

मरीज़-ए-इश्क़ की जुज़-मर्ग दुनिया में दवा क्यूँ हो

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

कुछ बात ही थी ऐसी कि थामे जिगर गए

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

जो होनी थी वो हम-नशीं हो चुकी

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

गुदाज़-ए-दिल से परवाना हुआ ख़ाक

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

दर्द को रहने भी दे दिल में दवा हो जाएगी

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

चर्चा हमारा इश्क़ ने क्यूँ जा-ब-जा किया

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

बुलबुल को फिर चमन में लगा लाई बू-ए-गुल

हकीम सय्यद मोहम्मद ग़ाज़ीपुरी

उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी

हकीम नासिर

मय-कशी गर्दिश-ए-अय्याम से आगे न बढ़ी

हकीम नासिर

जब से तू ने मुझे दीवाना बना रक्खा है

हकीम नासिर

हाए वो वक़्त-ए-जुदाई के हमारे आँसू

हकीम नासिर

ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए

हकीम नासिर

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