दिल Poetry (page 215)

आँखों ने हाल कह दिया होंट न फिर हिला सके

हकीम नासिर

बाद-ए-सरसर है नसीम-ए-गुलिस्ताँ मेरे लिए

हकीम मोहम्मद हुसैन अहक़र

वो जो अब तक लम्स है उस लम्स का पैकर बने

हकीम मंज़ूर

सारे चेहरे ताँबे के हैं लेकिन सब पर क़लई है

हकीम मंज़ूर

मिरे वजूद की दुनिया में है असर किस का

हकीम मंज़ूर

कुछ समझ आया न आया मैं ने सोचा है उसे

हकीम मंज़ूर

कोई पयाम अब न पयम्बर ही आएगा

हकीम मंज़ूर

ख़ुशबुओं की दश्त से हमसायगी तड़पाएगी

हकीम मंज़ूर

भेजता हूँ हर रोज़ मैं जिस को ख़्वाब कोई अन-देखा सा

हकीम मंज़ूर

अजब सहरा बदन पर आब का इबहाम रक्खा है

हकीम मंज़ूर

बहिश्त-ए-बरीँ

हाजी लक़ लक़

क्या उन को दिल का हाल सुनाने से फ़ाएदा

हाजी लक़ लक़

गुलों से नहीं शाख़ के दिल से पूछो

हैरत गोंडवी

मोहब्बत में इंकार कितना हसीं है

हैरत गोंडवी

हुस्न है काफ़िर बनाने के लिए

हैरत गोंडवी

'हैरत' के दिल पे वार किया हाए क्या किया

हैरत गोंडवी

आईना देखता हूँ नज़र आ रहे हो तुम

हैरत गोंडवी

ये महव हुए देख के बे-साख़्ता-पन को

हैरत इलाहाबादी

सुना है ज़ख़्मी-ए-तेग़-ए-निगह का दम निकलता है

हैरत इलाहाबादी

पानी में भी चाँद सितारे उग आते हैं

हैदर क़ुरैशी

वस्ल की शब थी और उजाले कर रक्खे थे

हैदर क़ुरैशी

उस दरबार में लाज़िम था अपने सर को ख़म करते

हैदर क़ुरैशी

तुम्हारे इश्क़ में किस किस तरह ख़राब हुए

हैदर क़ुरैशी

जो बस में है वो कर जाना ज़रूरी हो गया है

हैदर क़ुरैशी

फ़स्ल-ए-ग़म की जब नौ-ख़ेज़ी हो जाती है

हैदर क़ुरैशी

अजीब कर्ब-ओ-बला की है रात आँखों में

हैदर क़ुरैशी

अब के उस ने कमाल कर डाला

हैदर क़ुरैशी

ये दिल लगाने में मैं ने मज़ा उठाया है

हैदर अली आतिश

वहशत-ए-दिल ने किया है वो बयाबाँ पैदा

हैदर अली आतिश

उस बला-ए-जाँ से 'आतिश' देखिए क्यूँकर बने

हैदर अली आतिश

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