दिल Poetry (page 277)

बात मेरी कभी सुनी ही नहीं

दाग़ देहलवी

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

दाग़ देहलवी

अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का

दाग़ देहलवी

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

दाग़ देहलवी

अब वो ये कह रहे हैं मिरी मान जाइए

दाग़ देहलवी

आरज़ू है वफ़ा करे कोई

दाग़ देहलवी

आप का ए'तिबार कौन करे

दाग़ देहलवी

चेहरे पे नूर-ए-सुब्ह सियह गेसुओं में रात

दाएम ग़व्वासी

बाब-ए-रहमत पे दुआ गिर्या-कुनाँ हो जैसे

दाएम ग़व्वासी

किसी ने बा-वफ़ा समझा किसी ने बेवफ़ा समझा

डी. राज कँवल

खुलती है चाँदनी जहाँ वो कोई बाम और है

डी. राज कँवल

हम को छेड़ा तो मचल जाएँगे अरमाँ की तरह

डी. राज कँवल

दुनिया पत्थर फेंक रही है झुँझला कर फ़र्ज़ानों पर

डी. राज कँवल

दुनिया में दिल लगा के बहुत सोचते रहे

डी. राज कँवल

ये हादसा मिरी आँखों से गर नहीं होता

चित्रांश खरे

लोग सारे भले नहीं होते

चित्रांश खरे

जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नहीं होता

चित्रांश खरे

दोनों की आरज़ू में चमक बरक़रार है

चित्रांश खरे

इस तरह कर गया दिल को मिरे वीराँ कोई

चराग़ हसन हसरत

इक इश्क़ का ग़म आफ़त और उस पे ये दिल आफ़त

चराग़ हसन हसरत

ये मायूसी कहीं वज्ह-ए-सुकून-ए-दिल न बन जाए

चराग़ हसन हसरत

या-रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता

चराग़ हसन हसरत

जब से तेरा करम है बंदा-नवाज़

चराग़ हसन हसरत

इस तरह कर गया दिल को मिरे वीराँ कोई

चराग़ हसन हसरत

दुश्मन जवानियों की ये आश्नाइयाँ हैं

चराग़ हसन हसरत

नज़्म

चाैधरी मोहम्मद नईम

क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले

चरख़ चिन्योटी

क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले

चरख़ चिन्योटी

गुनगुनाती हुई आवाज़ कहाँ से लाऊँ

चरख़ चिन्योटी

बे-ख़ुदी में है न वो पी कर सँभल जाने में है

चरख़ चिन्योटी

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