दुनिया Poetry (page 8)

वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता

वसीम बरेलवी

उस ने मेरी राह न देखी और वो रिश्ता तोड़ लिया

वसीम बरेलवी

सिर्फ़ तेरा नाम ले कर रह गया

वसीम बरेलवी

सभी का धूप से बचने को सर नहीं होता

वसीम बरेलवी

रंग बे-रंग हों ख़ुशबू का भरोसा जाए

वसीम बरेलवी

मुझे तो क़तरा ही होना बहुत सताता है

वसीम बरेलवी

मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है

वसीम बरेलवी

मिटे वो दिल जो तिरे ग़म को ले के चल न सके

वसीम बरेलवी

कितना दुश्वार था दुनिया ये हुनर आना भी

वसीम बरेलवी

खुल के मिलने का सलीक़ा आप को आता नहीं

वसीम बरेलवी

चलो हम ही पहल कर दें कि हम से बद-गुमाँ क्यूँ हो

वसीम बरेलवी

अपने साए को इतना समझाने दे

वसीम बरेलवी

अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा

वसीम बरेलवी

अपने अंदाज़ का अकेला था

वसीम बरेलवी

मुझ को दुनिया से बे-ख़बर कर दे

वसीम अकरम

मुझ को दुनिया से बे-ख़बर कर दे

वसीम अकरम

तिरी नज़र से दिलों के चराग़ जल उठ्ठे

वाक़िफ़ राय बरेलवी

ग़ैर-मुमकिन था ये इक काम मगर हम ने किया

वक़ार वासिक़ी

पेश वो हर पल है साहब

वक़ार सहर

ज़ियादा सोचने वाले तुझे पता नहीं है

वक़ार ख़ान

जहाँ पे इल्म की कोई क़द्र और हवाला नहीं

वक़ार ख़ान

चश्म-ए-तर है सहाब है क्या है

वक़ार हिल्म सय्यद नगलवी

उन की चश्म-ए-मस्त में पोशीदा इक मय-ख़ाना था

वक़ार बिजनोरी

नज़र मिलते ही बरसे अश्क-ए-ख़ूँ क्यूँ दीदा-ए-तर से

वक़ार बिजनोरी

रात के समुंदर में ग़म की नाव चलती है

वामिक़ जौनपुरी

हो रही है दर-ब-दर ऐसी जबीं-साई कि बस

वामिक़ जौनपुरी

कोई अपने वास्ते महशर उठा कर ले गया

वलीउल्लाह वली

है क़ानून-ए-फ़ितरत कोई क्या करेगा

वलीउल्लाह वली

बे-नियाज़ नग़्मा-ए-दुनिया हूँ मैं

वलीउल्लाह वली

काश हम नाकाम भी काम आएँ तेरे इश्क़ में

वलीउल्लाह मुहिब

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