जान Poetry (page 16)

जान मुक़द्दर में थी जान से प्यारा न था

शहज़ाद अहमद

दिल बहुत मसरूफ़ था कल आज बे-कारों में है

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

अक्स-ए-याद-ए-यार को धुँदला किया है

शहरयार

अहद-ए-हाज़िर की दिल-रुबा मख़्लूक़

शहरयार

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

शहरयार

हमारी आँख में नक़्शा ये किस मकान का है

शहरयार

दिल चीज़ क्या है आप मिरी जान लीजिए

शहरयार

पतंग उड़ाने से पहले

शहराम सर्मदी

इनायत है तिरी बस एक एहसान और इतना कर

शहराम सर्मदी

फ़न के शजर पर फल जो लगे हैं

शहूद आलम आफ़ाक़ी

नए युग का ख़्वाब

शहनाज़ नबी

वो सामने हों मिरे और नज़र झुकी न रहे

शहनाज़ मुज़म्मिल

वहशतों को भी अब कमाल कहाँ

शाहिदा हसन

ठहरा है क़रीब-ए-जान आ कर

शाहिदा हसन

सानेहा हो के रहा चश्म का मुरझा जाना

शाहिदा हसन

भटक रही है अंधेरों में आँख देखे क्या

शाहिद माहुली

ये ज़रूरत है तो फिर इस को ज़रूरत से न देख

शाहिद कमाल

सब हैं मसरूफ़ किसी को यहाँ फ़ुर्सत नहीं है

शाहिद कमाल

में क्या हूँ कौन हूँ ये बताने से मैं रहा

शाहिद कमाल

मैं कहाँ तक तुझे सफ़ाई दूँ

शाहिद कमाल

कुंज-ए-दिल में है जो मलाल उछाल

शाहिद कमाल

कुछ यक़ीं सा गुमान सा कुछ है

शाहिद कमाल

ख़ुद मुझ को मेरे दस्त-ए-कमाँ-गीर से मिला

शाहिद कमाल

ख़ुद मुझ को मेरे दस्त-ए-कमाँ-गीर से मिला

शाहिद कमाल

जो मिरी पुश्त में पैवस्त है उस तीर को देख

शाहिद कमाल

जो इस ज़मीन पे रहते थे आसमान से लोग

शाहिद कमाल

ऐ ज़ौक़ अर्ज़-ए-हुनर हर्फ़-ए-ए'तिदाल में रख

शाहिद कमाल

अब्र लिखती है कहीं और घटा लिखती है

शाहिद कमाल

आज फिर रू-ब-रू करोगे तुम

शाहिद कमाल

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.