जान Poetry (page 15)

बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी है

शकील बदायुनी

सिंगापुर

शकील आज़मी

ज़रा से ग़म के लिए जान से गुज़र जाना

शकील आज़मी

साहिल तमाम अश्क-ए-नदामत से अट गया

शकेब जलाली

गले मिला न कभी चाँद बख़्त ऐसा था

शकेब जलाली

बस इक शुआ-ए-नूर से साया सिमट गया

शकेब जलाली

शब-ए-तन्हाई

शाइस्ता मुफ़्ती

लिखे हुए अल्फ़ाज़ में तासीर नहीं है

शाइस्ता मुफ़्ती

क़ुर्बान सौ तरह से किया तुझ पर आप को

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

नहीं है शिकवा अगर वो नज़र नहीं आता

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कलेजा मुँह को आया और नफ़स करने लगा तंगी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़-बाज़ी बुल-हवस बाज़ी न जान

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरा दिल यार अगर माइल करे है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

शैख़ तू तो मुरीद-ए-हस्ती है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न तन में उस्तुख़्वान ने रग रही है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कलेजा मुँह को आया और नफ़स करने लगा तंगी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो मिरे हम-अस्र हम-सोहबत थे सो सब मर गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ ने चुटकी सी ली फिर आ के मेरी जाँ के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस ज़माने में न हो क्यूँकर हमारा दिल उदास

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चमन में दहर के हर गुल है कान की सूरत

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बे तिरे जान न थी जान मिरी जान के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

आई ईद व दिल में नहीं कुछ हवा-ए-ईद

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

कफ़न-चोर

शहज़ाद नय्यर

जिस को जाना ही नहीं उस को ख़ुदा क्यूँ मानें

शहज़ाद अहमद

अब मिरा दर्द मरी जान हुआ जाता है

शहज़ाद अहमद

बे-शुमार आँखें

शहज़ाद अहमद

वाक़िआ कोई न जन्नत में हुआ मेरे ब'अद

शहज़ाद अहमद

मैं जो रोता हूँ तो कहते हो कि ऐसा न करो

शहज़ाद अहमद

जो शजर सूख गया है वो हरा कैसे हो

शहज़ाद अहमद

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