चलो चलें Poetry (page 50)

बदलने रंग सिखलाए जहाँ को

बयान मेरठी

तेरा सितम जो मुझ से गदा ने सहा सहा

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

तेग़ चढ़ उस की सान पर आई

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

दिल अब उस दिल-शिकन के पास कहाँ

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

नहीं ये जल्वा-हा-ए-राज़-ए-इरफ़ाँ देखने वाले

बासित भोपाली

मेरे रोने पर किसी की चश्म गिर्यां हाए हाए

बासित भोपाली

जब मिलेंगे कि अब मिलेंगे आप

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

किसे ख़बर है मैं दिल से कि जाँ से गुज़रूँगा

बशीर सैफ़ी

वो कभी शाख़-ए-गुल-ए-तर की तरह लगता है

बशीर फ़ारूक़

सबा गुल-ए-रेज़ जाँ-परवर फ़ज़ा है

बशीर फ़ारूक़

वो शख़्स जिस को दिल ओ जाँ से बढ़ के चाहा था

बशीर बद्र

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

बशीर बद्र

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है

बशीर बद्र

मेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे

बशीर बद्र

या मह-ओ-साल की दीवार गिरा दी जाए

बशीर अहमद बशीर

न कोई उन के सिवा और जान-ए-जाँ देखा

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

हिन्द के जाँ-बाज़ सिपाही

बर्क़ देहलवी

वो मक़ाम-ए-दिल-ओ-जाँ क्या होगा

बाक़ी सिद्दीक़ी

वक़्त रस्ते में खड़ा है कि नहीं

बाक़ी सिद्दीक़ी

इस कार-ए-गह-ए-रंग में हम तंग नहीं क्या

बाक़ी सिद्दीक़ी

दिल जिंस-ए-मोहब्बत का ख़रीदार नहीं है

बाक़ी सिद्दीक़ी

तू नहीं तो तेरा दर्द-ए-जाँ-फ़ज़ा मिल जाएगा

बाक़ी अहमदपुरी

ख़ाल-ए-लब आफ़त-ए-जाँ था मुझे मालूम न था

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

ऐ इश्क़ तू हर-चंद मिरा दुश्मन-ए-जाँ हो

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

ख़ाल-ए-लब आफ़त-ए-जाँ था मुझे मालूम न था

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

ख़ाल-ए-लब आफ़त-ए-जाँ था मुझे मालूम न था

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

दवा बग़ैर कोई तिफ़्ल मर गया तो क्या हुआ

बाक़र नक़वी

उस ने कहा!

बाक़र मेहदी

गोडो

बाक़र मेहदी

वो रिंद क्या कि जो पीते हैं बे-ख़ुदी के लिए

बाक़र मेहदी

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