खाली Poetry (page 8)

ख़ाली ख़ाली रस्तों पे बे-कराँ उदासी है

सरवत ज़ेहरा

''एक नज़्म कहीं से भी शुरूअ हो सकती है''

सरवत हुसैन

आए हैं रंग बहाली पर

सरवत हुसैन

सर झुका लेता था पहले जिस को अक्सर देख कर

सरमद सहबाई

बना देगी ज़मीं को आज शायद आसमाँ बारिश

सरदार सलीम

ये झूट है कि बिछड़ने का उस को ग़म भी नहीं

सदार आसिफ़

ख़ता उस की मुआफ़ी से बड़ी है

सदार आसिफ़

परिंदा कमरे में रह गया

सारा शगुफ़्ता

ख़ाली आँखों का मकान

सारा शगुफ़्ता

मैं ने चाहा था कि अश्कों का तमाशा देखूँ

साक़ी फ़ारुक़ी

पोस्टर

साक़ी फ़ारुक़ी

पार्टी

साक़ी फ़ारुक़ी

पाम के पेड़ से गुफ़्तुगू

साक़ी फ़ारुक़ी

ख़ाली बोरे में ज़ख़्मी बिल्ला

साक़ी फ़ारुक़ी

अलकुबड़े

साक़ी फ़ारुक़ी

पाँव मारा था पहाड़ों पे तो पानी निकला

साक़ी फ़ारुक़ी

जान प्यारी थी मगर जान से बे-ज़ारी थी

साक़ी फ़ारुक़ी

दर्द पुराना आँसू माँगे आँसू कहाँ से लाऊँ

साक़ी फ़ारुक़ी

बग़दाद

सलमान अंसारी

मैं तुझ से लाख बिछड़ कर यहाँ वहाँ जाता

सलमान अख़्तर

क्या दिखाता है ये सफ़र देखो

सलमान अख़्तर

ज़ेहन की क़ैद से आज़ाद किया जाए उसे

सालिम सलीम

वुसअ'त-ए-दामान-ए-दिल को ग़म तुम्हारा मिल गया

सालिक लखनवी

हाँ कहीं जुगनू चमकता था चलो वापस चलो

सलीम शहज़ाद

मौसम का ज़हर दाग़ बने क्यूँ लिबास पर

सलीम शाहिद

क़ुर्बतें होते हुए भी फ़ासलों में क़ैद हैं

सलीम कौसर

दिल-ए-सीमाब-सिफ़त फिर तुझे ज़हमत दूँगा

सलीम कौसर

खो दिए हैं चाँद कितने इक सितारा माँग कर

सलीम फ़िगार

शजर तो कब का कट के गिर चुका है

सलीम अंसारी

आँसुओं से तू है ख़ाली दर्द से आरी हूँ मैं

सलीम अहमद

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