खाली Poetry (page 10)

शहर के फ़ुट-पाथ पर कुछ चुभते मंज़र देखना

सईद अख़्तर

अदू से शिकवा-ए-क़ैद-ओ-क़फ़स क्या

सईद आसिम

उन की याद में बहते आँसू ख़ुश्क अगर हो जाएँगे

सादिक़

एक वसिय्यत

सादिक़

गरचे सहल नहीं लेकिन तेरे कहने पर लाऊँगा

सादिक़

आज गुज़रे हुए लम्हों को पुकारा जाए

सबा जायसी

मिरे सिमटे लहू का इस्तिआरा ले गया कोई

रियाज़ लतीफ़

ये सीधे जो अब ज़ुल्फ़ों वाले हुए हैं

रियाज़ ख़ैराबादी

न आया हमें इश्क़ करना न आया

रियाज़ ख़ैराबादी

जफ़ा में नाम निकालो न आसमाँ की तरह

रियाज़ ख़ैराबादी

गुलों के पर्दे में शक्लें हैं मह-जबीनों की

रियाज़ ख़ैराबादी

छेड़ते हैं गुदगुदाते हैं फिर अरमाँ आज-कल

रियाज़ ख़ैराबादी

बहुत ही पर्दे में इज़हार-ए-आरज़ू करते

रियाज़ ख़ैराबादी

अक्स पर यूँ आँख डाली जाएगी

रियाज़ ख़ैराबादी

मुझे दे के दिल जान खोना पड़ा है

रिन्द लखनवी

मुझ बला-नोश को तलछट भी है काफ़ी साक़ी

रिन्द लखनवी

चराग़-ए-ज़ीस्त मद्धम है अभी तू नम न कर आँखें

रेनू नय्यर

आँसू अपनी चश्म-ए-तर से निकलें तो

राज़िक़ अंसारी

मैं जब भी क़त्ल हो कर देखता हूँ

राज़ी अख्तर शौक़

जिस ने बनाया हर आईना मैं ही था

राज़ी अख्तर शौक़

शम्अ' की आग़ोश ख़ाली कर के परवाना चला

रज़ा जौनपुरी

निकल मत घर से तू ऐ ख़ाना-आबाद

रज़ा अज़ीमाबादी

हर मौसम में ख़ाली-पन की मजबूरी हो जाओगे

रउफ़ रज़ा

हम अगर रद्द-ए-अमल अपना दिखाने लग जाएँ

रऊफ़ ख़ैर

अगर अनार में वो रौशनी नहीं भरता

रऊफ़ ख़ैर

रात के साए

राशिद आज़र

ये बे-नवाई हमारी सौदा-ए-सर है घर में बसा दिया है

राशिद आज़र

रुके हुए हैं जो दरिया उन्हें रवानी दे

रशीदुज़्ज़फ़र

शुरूअ' अहल-ए-मोहब्बत के इम्तिहान हुए

रशीद लखनवी

जोश-ए-वहशत मेरे तलवों को ये ईज़ा भी सही

रशीद लखनवी

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