सपना Poetry (page 12)

गुल ने ख़ुशबू को तज दिया न रहा

वज़ीर आग़ा

बाज़ औक़ात फ़राग़त में इक ऐसा लम्हा आता है

वसीम ताशिफ़

मैं ने चाहा है तुझे आम से इंसाँ की तरह

वसीम बरेलवी

बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें

वसीम बरेलवी

ख़्वाब नहीं देखा है

वसीम बरेलवी

दीवाने की जन्नत

वसीम बरेलवी

अदना सा बासी

वसीम बरेलवी

ज़िंदगी तुझ पे अब इल्ज़ाम कोई क्या रक्खे

वसीम बरेलवी

उस ने मेरी राह न देखी और वो रिश्ता तोड़ लिया

वसीम बरेलवी

रंग बे-रंग हों ख़ुशबू का भरोसा जाए

वसीम बरेलवी

न जाने क्यूँ मुझे उस से ही ख़ौफ़ लगता है

वसीम बरेलवी

मैं अपने ख़्वाब से बिछड़ा नज़र नहीं आता

वसीम बरेलवी

ख़ुशी का साथ मिला भी तो दिल पे बार रहा

वसीम बरेलवी

कहाँ सवाब कहाँ क्या अज़ाब होता है

वसीम बरेलवी

चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है

वसीम बरेलवी

चलो हम ही पहल कर दें कि हम से बद-गुमाँ क्यूँ हो

वसीम बरेलवी

खेल मौजों का ख़तरनाक सही क्या मैं इस खेल से डर जाऊँगा

वाक़िफ़ राय बरेलवी

नक़ीब-ए-बख़्त सारे सो चुके हैं

वक़ार सहर

गई है शाम अभी ज़ख़्म ज़ख़्म कर के मुझे

वक़ार मानवी

बे-मिस्ल-ओ-बे-हिसाब उजालों के बा'द भी

वक़ार ख़ान

मज़ा था हम को जो बुलबुल से दू-बदू करते

वक़ार हिल्म सय्यद नगलवी

चश्म-ए-तर है सहाब है क्या है

वक़ार हिल्म सय्यद नगलवी

जो सोचते रहे वो कर गुज़रना चाहते हैं

वक़ार फ़ातमी

सफ़र-ए-ना-तमाम

वामिक़ जौनपुरी

माँ

वामिक़ जौनपुरी

अलिफ़ लैला

वामिक़ जौनपुरी

सुर्ख़ दामन में शफ़क़ के कोई तारा तो नहीं

वामिक़ जौनपुरी

दीवाने दीवाने ठहरे खेल गए अँगारों से

वामिक़ जौनपुरी

दिल के वीराने को यूँ आबाद कर लेते हैं हम

वामिक़ जौनपुरी

कोई अपने वास्ते महशर उठा कर ले गया

वलीउल्लाह वली

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