सपना Poetry (page 20)

दुनिया के कुछ न कुछ तो तलबगार से रहे

सुहैल अहमद ज़ैदी

ख़राब-ए-दीद को यूँ ही ख़राब रहने दे

सुहा मुजद्ददी

'अंजुम' पे जो गुज़र गई उस का भला हिसाब क्या

सूफ़िया अनजुम ताज

मैं किसी कोने में

सुबोध लाल साक़ी

ज़ाविया कोई नहीं हम को मिलाने वाला

सुबोध लाल साक़ी

वो जो सूरत थी साथ साथ कभी सुर्ख़ महके गुलाब की सूरत

सुबहान असद

रग-ए-जाँ में समा जाती हो जानाँ

सुबहान असद

मैं यूँ तो ख़्वाब की ताबीर सोचता भी नहीं

सुबहान असद

और किस शय से दाग़-ए-दिल धोएँ

सुबहान असद

कभी जुदा दो बदन हुए तो दिलों पे ये दो अज़ाब उतरे

सोज़ नजीबाबादी

शायद तुझ से मिलने की गुंजाइश है

सोनरूपा विशाल

ख़ुशनुमा पल की गिरफ़्तारी करें

सोनरूपा विशाल

कभी कभी मुझे इतना भी तू निभाया कर

सोनरूपा विशाल

निगाह मुझ से मिलाने की उन में ताब नहीं

सिया सचदेव

लिखा जो अश्क से तहरीर में नहीं आया

सिया सचदेव

आँखें खुलीं तो जाग उठीं हसरतें तमाम

सिराज लखनवी

ये जब्र-ए-ज़िंदगी न उठाएँ तो क्या करें

सिराज लखनवी

तकिया-ए-मख़मली सिरहाने रख

सिराज औरंगाबादी

यार को बे-हिजाब देखा हूँ

सिराज औरंगाबादी

पुर-ख़ूँ है जिगर लाला-ए-सैराब की सौगंद

सिराज औरंगाबादी

दिल-ए-नादाँ मिरा है बे-तक़सीर

सिराज औरंगाबादी

बात कर दिल सती हिजाब निकाल

सिराज औरंगाबादी

अग़्यार छोड़ मुझ सें अगर यार होवेगा

सिराज औरंगाबादी

वीराँ बहुत है ख़्वाब-महल जागते रहो

सिराज अजमली

समुंदरों में सराब और ख़ुश्कियों में गिर्दाब देखता है

सिराज अजमली

तमीज़-ए-ख़्वाब-ओ-हक़ीक़त है शर्त-ए-बेदारी

सिकंदर अली वज्द

हज़ार नक़्स हैं मुझ में मिरे कमाल को देख

सिकंदर अली वज्द

सफ़र की धूप ने चेहरा उजाल रक्खा था

सिदरा सहर इमरान

प्यासा जो मेरे ख़ूँ का हुआ था सो ख़्वाब था

सिद्दीक़ मुजीबी

न कोई नक़्श न पैकर सराब चारों तरफ़

सिद्दीक़ मुजीबी

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