सपना Poetry (page 66)

ये ज़मीं ख़्वाब है आसमाँ ख़्वाब है

फ़रहत शहज़ाद

मैं अपने-आप से बरहम था वो ख़फ़ा मुझ से

फ़रहत शहज़ाद

जब तक चराग़-ए-शाम-ए-तमन्ना जले चलो

फ़रहत शहज़ाद

आँख को जकड़े थे कल ख़्वाब अज़ाबों के

फ़रहत शहज़ाद

मेरा हर ख़्वाब तो बस ख़्वाब ही जैसा निकला

फ़रहत नदीम हुमायूँ

था पहला सफ़र उस की रिफ़ाक़त भी नई थी

फ़रहत नदीम हुमायूँ

हाल में जीने की तदबीर भी हो सकती है

फ़रहत नदीम हुमायूँ

ऐ कातिब-ए-तक़दीर ये तक़दीर में लिख दे

फ़रहत नदीम हुमायूँ

वो बहकी निगाहें क्या कहिए वो महकी जवानी क्या कहिए

फ़रहत कानपुरी

जब उस को देखते रहने से थकने लगता हूँ

फ़रहत एहसास

ना-रसाई

फ़रहत एहसास

दुनिया को कहाँ तक जाना है

फ़रहत एहसास

ज़मीं से अर्श तलक सिलसिला हमारा भी था

फ़रहत एहसास

वस्ल की रात में हम रात में बह जाते हैं

फ़रहत एहसास

पहले तो ज़रा सा हट के देखा

फ़रहत एहसास

मैं तमाम गर्द-ओ-ग़ुबार हूँ मुझे मेरी सूरत-ए-हाल दे

फ़रहत एहसास

मैं अपने रू-ए-हक़ीक़त को खो नहीं सकता

फ़रहत एहसास

झगड़े ख़ुदा से हो गए अहद-ए-शबाब में

फ़रहत एहसास

जब उस को देखते रहने से थकने लगता हूँ

फ़रहत एहसास

इस तरह आता हूँ बाज़ारों के बीच

फ़रहत एहसास

हुई इक ख़्वाब से शादी मिरी तन्हाई की

फ़रहत एहसास

हर इक जानिब उन आँखों का इशारा जा रहा है

फ़रहत एहसास

है शोर साहिलों पर सैलाब आ रहा है

फ़रहत एहसास

एक ग़ज़ल कहते हैं इक कैफ़िय्यत तारी कर लेते हैं

फ़रहत एहसास

दिनी हैं सब कोई राती नहीं है

फ़रहत एहसास

देखते ही देखते खोने से पहले देखते

फ़रहत एहसास

बीमार हो गया हूँ शिफा-ख़ाना चाहिए

फ़रहत एहसास

बहुत सी आँखें लगीं हैं और एक ख़्वाब तय्यार हो रहा है

फ़रहत एहसास

औरों का सारा काम मुझे दे दिया गया

फ़रहत एहसास

तुम्हारे ख़्वाब मिरे साथ साथ चलते हैं

फ़रहत अब्बास शाह

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