सपना Poetry (page 85)

तक़दीर पे शाकिर रह कर भी ये कौन कहे तदबीर न कर

आरज़ू लखनवी

तड़पते दिल को न ले इज़्तिराब लेता जा

आरज़ू लखनवी

क़ुर्बत बढ़ा बढ़ा कर बे-ख़ुद बना रहे हैं

आरज़ू लखनवी

मासूम नज़र का भोला-पन ललचा के लुभाना क्या जाने

आरज़ू लखनवी

रक़्स-ए-आशुफ़्ता-सरी की कोई तदबीर सही

अर्शी भोपाली

कारवाँ तीरा-शब में चलते हैं

अर्शी भोपाली

वो जिस ने मेरे दिल ओ जाँ में दर्द बोया है

अरशद सिद्दीक़ी

मैं ख़ाक छानता हूँ आफ़्ताब देखता हूँ

अरशद महमूद नाशाद

हम जुनूँ पेशा कि रहते थे तिरी ज़ात में गुम

अरशद महमूद नाशाद

मैं ने उसी से हाथ मिलाया था और बस

अरशद महमूद अरशद

कोई नहीं है इंतिज़ार सुब्ह-ए-विसाल के सिवा

अरशद लतीफ़

नफ़ी ओ इसबात

अरशद कमाल

जाने किस रुत में खिलेंगे यहाँ ताबीर के फूल

अरशद जमाल 'सारिम'

प्यास हर ज़र्रा-ए-सहरा की बुझाई गई है

अरशद जमाल 'सारिम'

नित-नए नक़्श से बातिन को सजाता हुआ मैं

अरशद जमाल 'सारिम'

सपेदी रंग-ए-जहाँ में नहीं मिलाता हूँ

अरशद जमाल हश्मी

ख़्वाब क्या है कि टूटता ही नहीं

अरशद जमाल हश्मी

आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली

अरशद जमाल हश्मी

ये बारीक उन की कमर हो गई

अरशद अली ख़ान क़लक़

रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का

अरशद अली ख़ान क़लक़

आएँगे वो तो आप में हरगिज़ न आएँगे

अरशद अली ख़ान क़लक़

मुद्दतों घाव किए जिस के बदन पर हम ने

अरशद अब्दुल हमीद

सुख़न के चाक में पिन्हाँ तुम्हारी चाहत है

अरशद अब्दुल हमीद

मुझ को तक़दीर ने यूँ बे-सर-ओ-आसार किया

अरशद अब्दुल हमीद

मुझ सा बेताब यहाँ कोई नहीं मेरे सिवा

अरशद अब्दुल हमीद

लकीर-ए-संग को अन्क़ा-मिसाल हम ने किया

अरशद अब्दुल हमीद

ग़ज़ल में जान पड़ी गुफ़्तुगू में फूल खिले

अरशद अब्दुल हमीद

फ़सील-ए-सब्र में रौज़न बनाना चाहती है

अरशद अब्दुल हमीद

हम हद-ए-इंदिमाल से भी गए

अर्श सिद्दीक़ी

मैं हूँ ऐसे बिखरा सा

अर्श सहबाई

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