मौत Poetry (page 3)

जो अदू-ए-बाग़ हो बरबाद हो

वज़ीर अली सबा लखनवी

आप अपनी बेवफ़ाई देखिए

वज़ीर अली सबा लखनवी

डर मौत का न ख़ौफ़ किसी देवता का था

वसीम मीनाई

मफ़रूर कभी ख़ुद पर शर्मिंदा नज़र आए

वसीम मलिक

कम सितम करने में क़ातिल से नहीं दिल मेरा

वसीम ख़ैराबादी

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है

वसीम बरेलवी

मज़ा था हम को जो बुलबुल से दू-बदू करते

वक़ार हिल्म सय्यद नगलवी

देहली

वामिक़ जौनपुरी

भूका बंगाल

वामिक़ जौनपुरी

उम्र की रौ बदल गई शायद

वामिक़ जौनपुरी

ब-तस्ख़ीर-बुताँ तस्बीह क्यूँ ज़ाहिद फिराते हैं

वलीउल्लाह मुहिब

तिरे लब-बिन है दिल में शोला-ज़न मुल जिस को कहते हैं

वली उज़लत

घर यार का हम से दूर पड़ा गई हम से राहत एक तरफ़

वली उज़लत

किसी सूरत कोई सूरत निकालो

वकील अख़्तर

कभी लुत्फ़-ए-ज़बान-ए-ख़ुश-बयाँ थे

वाजिद अली शाह अख़्तर

पैमान-ए-वफ़ा-ए-यार हैं हम

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

ज़िंदगी

वहीदुद्दीन सलीम

परोमीथियस

वहीद अख़्तर

और सब कुछ बहाल रक्खा है

विनीत आश्ना

हवा-ए-शोख़ की आख़िर फ़ुसूँ कारी ये कैसी है

वली मदनी

वही हादसों के क़िस्से वही मौत की कहानी

वफ़ा बराही

यास ओ उमीद

उरूज क़ादरी

साफ़ आता है नज़र अंजाम हर आग़ाज़ का

तिलोकचंद महरूम

किसी की याद को हम ज़ीस्त का हासिल समझते हैं

तिलोकचंद महरूम

हमारे वास्ते है एक जीना और मर जाना

तिलोकचंद महरूम

फ़ित्ना-आरा शोरिश-ए-उम्मीद है मेरे लिए

तिलोकचंद महरूम

एक सन्नाटा सा तक़रीर में रक्खा गया था

तसनीम आबिदी

रहने वालों को तिरे कूचे के ये क्या हो गया

मीर तस्कीन देहलवी

कर सके दफ़्न न उस कूचे में अहबाब मुझे

मीर तस्कीन देहलवी

मौत बर-हक़ है तो फिर मौत से डरना कैसा

तारिक़ मतीन

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