मिल Poetry (page 44)

ढूँडते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

ऐतबार साजिद

बंद दरीचे सूनी गलियाँ अन-देखे अनजाने लोग

ऐतबार साजिद

मैं हँस रहा था गरचे मिरे दिल में दर्द था

ऐश बर्नी

पाँव फँसे में हाथ छुड़ाने आया था

ऐनुद्दीन आज़िम

पहले तो शहर ऐसा न था

ऐन ताबिश

आँसुओं के रतजगों से

ऐन ताबिश

ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ

ऐन ताबिश

कभी जो मिल न सकी उस ख़ुशी का हासिल है

ऐन इरफ़ान

जब तक अपने दिल में उन का ग़म रहा

अहसन मारहरवी

ज़रुरत-ए-इत्तिहाद

अहमक़ फफूँदवी

मुस्तक़बिल

अहमक़ फफूँदवी

इल्म की ज़रूरत

अहमक़ फफूँदवी

हमारा देस

अहमक़ फफूँदवी

साग़र क्यूँ ख़ाली है मिरा ऐ साक़ी तिरे मयख़ाने में

अहमद शाहिद ख़ाँ

ज़िंदगी ग़म की आँच सह कोई

अहमद रियाज़

ज़िंदगी

अहमद राही

ग़म-गुसारी

अहमद राही

तू जो बदला तो ज़माना भी बदल जाएगा

अहमद नदीम क़ासमी

साँस लेना भी सज़ा लगता है

अहमद नदीम क़ासमी

मैं हूँ या तू है ख़ुद अपने से गुरेज़ाँ जैसे

अहमद नदीम क़ासमी

इक मोहब्बत के एवज़ अर्ज़-ओ-समा दे दूँगा

अहमद नदीम क़ासमी

बहता आँसू एक झलक में कितने रूप दिखाएगा

अहमद मुश्ताक़

बहता आँसू एक झलक में कितने रूप दिखाएगा

अहमद मुश्ताक़

अब न बहल सकेगा दिल अब न दिए जलाइए

अहमद मुश्ताक़

अब न बहल सकेगा दिल अब न दिए जलाइए

अहमद मुश्ताक़

आज रो कर तो दिखाए कोई ऐसा रोना

अहमद मुश्ताक़

कह डाले ग़ज़लों नज़्मों में अफ़्साने क्या क्या

अहमद मासूम

ज़िंदा रहने का तक़ाज़ा नहीं छोड़ा जाता

अहमद कामरान

मिट्टी से बग़ावत न बग़ावत से गुरेज़ाँ

अहमद कामरान

मैं रंग-ए-आसमाँ कर के सुनहरी छोड़ देता हूँ

अहमद कमाल परवाज़ी

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