चित्रा Poetry (page 5)

ख़ूनीं गुलाब सब्ज़ सनोबर है सामने

शकेब अयाज़

मैं अपने दस्त पर शब ख़्वाब में देखा कि अख़गर था

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

थोड़ा सा रंग रात के चेहरे पे डाल दो

शहज़ाद अहमद

कुछ न कुछ हो तो सही अंजुमन-आराई को

शहज़ाद अहमद

कमरों में छुपने के दिन हैं और न बरहना रातें हैं

शहज़ाद अहमद

तुझ को देखा नहीं महसूस किया है मैं ने

शाहिद मीर

ऐ ख़ुदा रेत के सहरा को समुंदर कर दे

शाहिद मीर

हाशिए पर कुछ हक़ीक़त कुछ फ़साना ख़्वाब का

शाहिद माहुली

हर दर-ओ-दीवार पे लर्ज़ां कोई पैकर लगे

शाहिद माहुली

फ़िक्र-ए-ईजाद में हूँ खोल नया दर कोई

शाहिद कमाल

मेरे दिल में घर भी बनाता रहता है

शाहिद ग़ाज़ी

ए'तिराफ़

शाहिद अख़्तर

सुकूँ का एक भी लम्हा जो दिल को मिलता है

शाहीन सिद्दीक़ी

गर्म-जोशी के नगर में सर्द-तन्हाई मिली

शाहीन बद्र

अगर वो हम-सफ़र ठहरें तो हम को डर में रखते हैं

शफ़ीक़ आसिफ़

गले लगाए रहा सब का ध्यान था इतना

शाद शाद नूही

नींद से आँख वो मिल कर जागे

शायर लखनवी

ख़्वाब से आँख वो मल कर जागे

शायर लखनवी

खोट की माला झूट जटाएँ अपने अपने ध्यान

सीमाब ज़फ़र

आसमाँ भी पुकारता है मुझे

सीमा शर्मा मेरठी

चेहरे चाँद सितारों वाले हेरा-फेरी करते हैं

सरफ़राज़ शाहिद

दिन-ब-दिन सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा जाता हूँ

सरदार सलीम

सीमिया

सलमान अंसारी

सालिम यक़ीन-ए-अज़्मत-ए-सेहर-ए-ख़ुदा न तोड़

सलीम शुजाअ अंसारी

पस-ए-निगाह कोई लौ भड़कती रहती है

सालिम सलीम

फिर कोई महशर उठाने मेरी तन्हाई में आ

सलीम शाहिद

मत पूछ कि इस पैकर-ए-ख़ुश-रंग में क्या है

सलीम शाहिद

दर्द की ख़ुश्बू से सारा घर मोअ'त्तर हो गया

सलीम शाहिद

क्या लुत्फ़ हवाओं के सफ़र में नहीं रक्खा

सलीम फ़राज़

दिलों में दर्द भरता आँख में गौहर बनाता हूँ

सलीम अहमद

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