करार Poetry (page 11)

कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इश्क़ मिन्नत-कश-ए-क़रार नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम ने सब शेर में सँवारे थे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हिमाला की दासियाँ

फ़ैसल सईद फ़ैसल

चले थे घर से तो हम दर्द की दवा के लिए

एजाज़ अहमद एजाज़

शदीद गरमी के मौसम में मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

कराची का क़ब्रिस्तान

दिलावर फ़िगार

मैं ग़र्क़ हो रहा था कि तूफ़ान-ए-इश्क़ ने

दिल शाहजहाँपुरी

ऐ इश्क़ तू ने वाक़िफ़-ए-मंज़िल बना दिया

दिल शाहजहाँपुरी

ले दाम-ए-निगाह-ए-यार आया

दाऊद औरंगाबादी

ख़ुश-फमी-ए-हुनर ने सँभलने नहीं दिया

दरवेश भारती

यूँ मेरे साथ दफ़्न दिल-ए-बे-क़रार हो

दाग़ देहलवी

ये मज़ा था दिल-लगी का कि बराबर आग लगती

दाग़ देहलवी

उन के इक जाँ-निसार हम भी हैं

दाग़ देहलवी

पुकारती है ख़मोशी मिरी फ़ुग़ाँ की तरह

दाग़ देहलवी

मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो

दाग़ देहलवी

मुझ सा न दे ज़माने को परवरदिगार दिल

दाग़ देहलवी

कुछ लाग कुछ लगाव मोहब्बत में चाहिए

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

दाग़ देहलवी

क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले

चरख़ चिन्योटी

क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले

चरख़ चिन्योटी

फ़ित्ना-ए-रोज़गार की बातें

चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी

सवाद-ए-शाम से डरता हुआ नज़र आया

बुशरा ज़ैदी

कहाँ आया है दीवानों को तेरा कुछ क़रार अब तक

बिस्मिल अज़ीमाबादी

कभी सुकूँ कभी सब्र-ओ-क़रार टूटेगा

भारत भूषण पन्त

मौत आ रही है वादे पे या आ रहे हो तुम

बेख़ुद देहलवी

क़यामत है जो ऐसे पर दिल-ए-उम्मीद-वार आए

बेख़ुद देहलवी

यूँही रहा जो बुतों पर निसार दिल मेरा

बेखुद बदायुनी

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