रास्ता Poetry (page 27)

कुछ हैं मंज़र हाल के कुछ ख़्वाब मुस्तक़बिल के हैं

सलीम अहमद

कोई सितारा-ए-गिर्दाब आश्ना था मैं

सलीम अहमद

कल नशात-ए-क़ुर्ब से मौसम बहार-अंदाज़ा था

सलीम अहमद

इश्क़ में जिस के ये अहवाल बना रक्खा है

सलीम अहमद

हम हैं और राह-ए-कू-ए-बदनामी

सलीम अहमद

दिल हुस्न को दान दे रहा हूँ

सलीम अहमद

अवाम

सलाम मछली शहरी

अंदेशा

सलाम मछली शहरी

ये अब्र-ओ-बाद ये तूफ़ान ये अँधेरी रात

सलाम मछली शहरी

कभी कभी अर्ज़-ए-ग़म की ख़ातिर हम इक बहाना भी चाहते हैं

सलाम मछली शहरी

हवा ज़माने की साक़ी बदल तो सकती है

सलाम मछली शहरी

फ़सील-ए-शहर को जब तक गिरा नहीं देंगे

सलाहुद्दीन नय्यर

राह में कोई खड़ा हो जैसे

शख़ावत शमीम

क्या क्या न तिरे शौक़ में टूटे हैं यहाँ कुफ़्र

सज्जाद बाक़र रिज़वी

यही सुनते आए हैं हम-नशीं कभी अहद-ए-शौक़-ए-कमाल में

सज्जाद बाक़र रिज़वी

सोए हुओं में ख़्वाब से बेदार कौन है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

शो'ला सा कोई बर्क़-ए-नज़र से नहीं उठता

सज्जाद बाक़र रिज़वी

पूछो मुझे ऐ हम-नफ़साँ कौन हूँ क्या हूँ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मिरे सफ़र की हदें ख़त्म अब कहाँ होंगी

सज्जाद बाक़र रिज़वी

इस दिल को क्या कहें कि जिधर था उधर न था

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हम राज़-ए-गिरफ़्तारी-ए-दिल जान गए हैं

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हो दिल-लगी में भी दिल की लगी तो अच्छा है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हमें चार सम्त की दौड़ में वही गर्द-ए-बाद-ए-सदा मिला

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दुनिया दुनिया सैर सफ़र थी शौक़ की राह तमाम हुई

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दिल ख़ूँ हुआ है शोख़ी-ए-रंग-ए-हिना के साथ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

ब-क़द्र-ए-हौसला कोई कहीं कोई कहीं तक है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

खोल कर बात का भरम दोनों

सज्जाद बलूच

खोल कर बात का भरम दोनों

सज्जाद बलूच

हमें तो कल किसी अगले नगर पहुँचना है

सज्जाद बलूच

जलती हवाएँ कह गईं अज़्म-ए-सबात छोड़ दे

सज्जाद बाबर

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