रंग Poetry (page 27)

कुंज-ए-तन्हाई बसाए हिज्र की लज़्ज़त में हूँ

शफ़ीक़ सलीमी

जो भी हम से बन पड़ा करते रहे

शफ़ीक़ सलीमी

दिल टूट चुका तार-ए-नज़र टूट रहा है

शफ़ीक़ देहलवी

ख़ुद अपनी आँच से इक शख़्स जल गया मुझ में

शफ़ी ज़ामिन

मुझे किसी पे मोहब्बत का कुछ गुमाँ सा है

शफ़क़ सुपुरी

कुछ सबील-ए-रिज़्क़ हो फिर कहीं मकाँ भी हो

शफ़क़ सुपुरी

गुल-ए-ख़ुश-नुमा के लिबास में कि शुआ-ए-नूर में ढल के आ

शायर फतहपुरी

जान जोखिम से किए सर जो मराहिल तू ने

शादाब उल्फ़त

सदा रंग-ए-मीना चमकता रहा

शाद लखनवी

लब-ब-लब बिंत-उल-अनब हर-दम रहे

शाद लखनवी

ख़ुदा ही उस चुप की दाद देगा कि तुर्बतें रौंदे डालते हैं

शाद लखनवी

बोलना बादा-कशों से न ज़रा ऐ वाइज़

शाद लखनवी

अक़्लीम-ए-दिल पे इश्क़ की फ़रमाँ-रवाइयाँ

शाद बिलगवी

कितने अंजान जज़ीरों में मुझे ले के चला

शबनम शकील

बात ईमा-ओ-इशारत से बढ़ी आप ही आप

शबनम शकील

मैं ने किस शौक़ से इक उम्र ग़ज़ल-ख़्वानी की

शबनम रूमानी

कौन सा रंग इख़्तियार करें?

शबनम रूमानी

नज़्म

शबनम अशाई

नज़्म

शबनम अशाई

यमन का सितारा

शब्बीर शाहिद

बहार की धूप में नज़ारे हैं उस किनारे

शब्बीर शाहिद

भूकी है ज़मीं भूक उगलती ही रहेगी

शब्बीर नकिद

ये अपने आप पे ताज़ीर कर रही हूँ मैं

शबाना यूसुफ़

नींद से आँख वो मिल कर जागे

शायर लखनवी

ख़्वाब से आँख वो मल कर जागे

शायर लखनवी

जुदा हो कर वो हम से है जुदा क्या

शायर लखनवी

जो थके थके से थे हौसले वो शबाब बन के मचल गए

शायर लखनवी

जो ग़म-ए-हबीब से दूर थे वो ख़ुद अपनी आग में जल गए

शायर लखनवी

जेहल को इल्म का मेआ'र समझ लेते हैं

शायर लखनवी

हवा को और भी कुछ तेज़ कर गए हैं लोग

शायर लखनवी

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