रंग Poetry (page 88)

दावत

अख़्तर शीरानी

बस्ती की लड़कियों के नाम

अख़्तर शीरानी

यूँ तो किस फूल से रंगत न गई बू न गई

अख़्तर शीरानी

वादा उस माह-रू के आने का

अख़्तर शीरानी

उम्र भर की तल्ख़ बेदारी का सामाँ हो गईं

अख़्तर शीरानी

न भूल कर भी तमन्ना-ए-रंग-ओ-बू करते

अख़्तर शीरानी

हर एक जल्वा-ए-रंगीं मिरी निगाह में है

अख़्तर शीरानी

बजा कि है पास-ए-हश्र हम को करेंगे पास-ए-शबाब पहले

अख़्तर शीरानी

कहाँ से लाएँगे आँसू अज़ा-दारी के मौसम में

अख़तर शाहजहाँपुरी

निगाहें मुंतज़िर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

नैरंगी-ए-नशात-ए-तमन्ना अजीब है

अख़्तर सईद ख़ान

वो हुस्न-ए-सब्ज़ जो उतरा नहीं है डाली पर

अख़्तर रज़ा सलीमी

ये औरतें

अख़्तर पयामी

रिवायात की तख़्लीक़

अख़्तर पयामी

घरौंदे

अख़्तर पयामी

किसी का चेहरा किसी पर सजा नहीं देता

अख्तर लख़नवी

अब दर्द का सूरज कभी ढलता ही नहीं है

अख्तर लख़नवी

उदास कोहसार के नौहे

अख़्तर हुसैन जाफ़री

सुख़न दरमाँदा है

अख़्तर हुसैन जाफ़री

सधाए हुए परिंदे

अख़्तर हुसैन जाफ़री

मैं ग़ैर-महफ़ूज़ रात से डरता हूँ

अख़्तर हुसैन जाफ़री

चमन के रंग-ओ-बू ने इस क़दर धोका दिया मुझ को

अख़्तर होशियारपुरी

वो रंग-ए-तमन्ना है कि सद-रंग हुआ हूँ

अख़्तर होशियारपुरी

वो जो दीवार-ए-आश्नाई थी

अख़्तर होशियारपुरी

मेरे लहू में उस ने नया रंग भर दिया

अख़्तर होशियारपुरी

मंज़िलों के फ़ासले दीवार-ओ-दर में रह गए

अख़्तर होशियारपुरी

मैं उस का नाम घुले पानियों पे लिखता क्या

अख़्तर होशियारपुरी

किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था

अख़्तर होशियारपुरी

हर्फ़-ए-बे-आवाज़ से दहका हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

यूँ ख़ुद को ख़्वाहिशात के अक्सर दिखाए रंग

अख़तर बस्तवी

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