रंग Poetry (page 90)

यूँ मिरी तब्अ से होते हैं मआनी पैदा

अकबर इलाहाबादी

ये सुस्त है तो फिर क्या वो तेज़ है तो फिर क्या

अकबर इलाहाबादी

वो हवा न रही वो चमन न रहा वो गली न रही वो हसीं न रहे

अकबर इलाहाबादी

नई तहज़ीब से साक़ी ने ऐसी गर्म-जोशी की

अकबर इलाहाबादी

न रूह-ए-मज़हब न क़ल्ब-ए-आरिफ़ न शाइराना ज़बान बाक़ी

अकबर इलाहाबादी

मिल गया शरअ से शराब का रंग

अकबर इलाहाबादी

मज़हब का हो क्यूँकर इल्म-ओ-अमल दिल ही नहीं भाई एक तरफ़

अकबर इलाहाबादी

ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है

अकबर इलाहाबादी

कहाँ वो अब लुत्फ़-ए-बाहमी है मोहब्बतों में बहुत कमी है

अकबर इलाहाबादी

जज़्बा-ए-दिल ने मिरे तासीर दिखलाई तो है

अकबर इलाहाबादी

जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया

अकबर इलाहाबादी

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

अकबर इलाहाबादी

दिल-ए-मायूस में वो शोरिशें बरपा नहीं होतीं

अकबर इलाहाबादी

तुम्हारे दिल की तरह ये ज़मीन तंग नहीं

अकबर अली खान अर्शी जादह

सज़ा है किस के लिए और जज़ा है किस के लिए

अकबर अली खान अर्शी जादह

ख़ुश-रंग किस क़दर ख़स-ओ-ख़ाशाक थे कभी

अकबर अली खान अर्शी जादह

कभी ज़ख़्म ज़ख़्म निखर के देख कभी दाग़ दाग़ सँवर के देख

अकबर अली खान अर्शी जादह

आज यूँ मुझ से मिला है कि ख़फ़ा हो जैसे

अकबर अली खान अर्शी जादह

ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा

अजमल सिराज

किसी के हिज्र में जीना मुहाल हो गया है

अजमल सिराज

ज़िंदगी रोज़ बनाती है बहाने क्या क्या

अजमल सिद्दीक़ी

रो रो के बयाँ करते फिरो रंज-ओ-अलम ख़ूब

अजमल सिद्दीक़ी

अलग अलग तासीरें इन की, अश्कों के जो धारे हैं

अजमल सिद्दीक़ी

याद-ए-फ़िराक-ए-यार तिरा शुक्रिया बहुत

अजमल अजमली

ज़माने हो गए तेरे करम की आस लगी

अजीत सिंह हसरत

ये किस लिए है तू इतना उदास दरवाज़े

अजीत सिंह हसरत

मुझ को प्रेम कहानी कर दो

अजीत सिंह हसरत

जुस्तुजू में कमाल करता जा

अजीत सिंह हसरत

फूल थे रंग थे लम्हों की सबाहत हम थे

ऐतबार साजिद

मुझे अपने रूप की धूप दो कि चमक सकें मिरे ख़ाल-ओ-ख़द

ऐतबार साजिद

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