रंग Poetry (page 92)

जब तक जुनूँ जुनूँ है ग़म-ए-आगही भी है

अहमद ज़फ़र

आसमाँ की आँख सूरज चाँद बीनाई भी है

अहमद ज़फ़र

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

तसव्वुर को जगा रक्खा है उस ने

अहमद शनास

सुब्ह-ए-वजूद हूँ कि शब-ए-इंतिज़ार हूँ

अहमद शनास

फूलों में एक रंग है आँखों के नीर का

अहमद शनास

मोहब्बतों को कहीं और पाल कर देखो

अहमद शनास

लम्हा लम्हा रोज़ ओ शब को देर होती जाएगी

अहमद शनास

इमरोज़ की कश्ती को डुबोने के लिए हूँ

अहमद शनास

साग़र क्यूँ ख़ाली है मिरा ऐ साक़ी तिरे मयख़ाने में

अहमद शाहिद ख़ाँ

कोई तस्वीर बना ले कि तुझे याद रहें

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

किसी सूरत ये नुक्ता-चीनियाँ कुछ रंग तो लाईं

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

मैं ख़ाक हो रहा हूँ यहाँ ख़ाक-दान में

अहमद रिज़वान

कोई बतलाए कि क्या हैं यारो

अहमद राही

कभी तिरी कभी अपनी हयात का ग़म है

अहमद राही

कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है

अहमद राही

जिस राह से भी गुज़र गए हम

अहमद राही

रूह लबों तक आ कर सोचे

अहमद नदीम क़ासमी

पत्थर

अहमद नदीम क़ासमी

तेरी महफ़िल भी मुदावा नहीं तन्हाई का

अहमद नदीम क़ासमी

मरूँ तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊँ

अहमद नदीम क़ासमी

लब-ए-ख़ामोश से इफ़्शा होगा

अहमद नदीम क़ासमी

अजीब रंग तिरे हुस्न का लगाव में था

अहमद नदीम क़ासमी

धुएँ से आसमाँ का रंग मैला होता जाता है

अहमद मुश्ताक़

ये हम ग़ज़ल में जो हर्फ़-ओ-बयाँ बनाते हैं

अहमद मुश्ताक़

टूट गया हवा का ज़ोर सैल-ए-बला उतर गया

अहमद मुश्ताक़

तुम आए हो तुम्हें भी आज़मा कर देख लेता हूँ

अहमद मुश्ताक़

थम गया दर्द उजाला हुआ तन्हाई में

अहमद मुश्ताक़

तिरे दीवाने हर रंग रहे तिरे ध्यान की जोत जगाए हुए

अहमद मुश्ताक़

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