सबसे Poetry (page 17)

ज़ेहन ज़िंदा है मगर अपने सवालात के साथ

तनवीर अहमद अल्वी

मुझ को दिमाग़-ए-गर्मी-ए-बाज़ार है कहाँ

तालिब चकवाली

सवाल क्या है जवाब क्या है

तालीफ़ हैदर

फिर क़िस्सा-ए-शब लिख देने के ये दिल हालात बनाए है

तालीफ़ हैदर

भूली-बिसरी रात

तख़्त सिंह

उफ़ वो नज़र कि सब के लिए दिल-नवाज़ है

ताजवर नजीबाबादी

तिलिस्म-ए-इश्क़ था सब उस का साथ होने तक

ताजदार आदिल

किस ने आ कर हम को दी आवाज़ पिछली रात में

ताज सईद

जी में आता है कि चल कर जंगलों में जा रहें

ताज सईद

वो कम-सुख़न न था पर बात सोच कर करता

तैमूर हसन

वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था कि रात बीत गई

तैमूर हसन

तुम कोई इस से तवक़्क़ो' न लगाना मरे दोस्त

तैमूर हसन

मैं ने बख़्श दी तिरी क्यूँ ख़ता तुझे इल्म है

तैमूर हसन

बहार आने की उम्मीद के ख़ुमार में था

तैमूर हसन

तू ने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी

तहज़ीब हाफ़ी

चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें

तहज़ीब हाफ़ी

इसे मैं और ये मेरा असा ही तय करेगा

तहसीन फ़िराक़ी

सुकून-ए-दिल में वो बन के जब इंतिशार उतरा तो मैं ने देखा

ताहिर फ़राज़

जिस ने तेरी याद में सज्दे किए थे ख़ाक पर

ताहिर फ़राज़

अजीब हम हैं सबब के बग़ैर चाहते हैं

ताहिर फ़राज़

अब के बरस होंटों से मेरे तिश्ना-लबी भी ख़त्म हुइ

ताहिर फ़राज़

हर्फ़

ताहिर अज़ीम

मिला किसी से न अच्छा लगा सुख़न इस बार

तफ़ज़ील अहमद

इक परेशानी अलग थी और पशेमानी अलग

तफ़ज़ील अहमद

मिट गए हाए मकीं और मकान-ए-देहली

तफ़ज़्ज़ुल हुसैन ख़ान कौकब देहलवी

मिरे ऐबों को गिनवाया तो सब ने

ताबिश मेहदी

यादों की क़िंदील जलाना कितना अच्छा लगता है

ताबिश मेहदी

ख़ता मैं ने कोई भारी नहीं की

ताबिश मेहदी

जहान-ए-दिल में सन्नाटा बहुत है

ताबिश मेहदी

हमारा डूबना मुश्किल नहीं था

ताबिश कमाल

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