सबसे Poetry (page 58)

तेरी मुश्किल किसी को क्या मालूम

इमरान शमशाद

रफ़्ता रफ़्ता सब कुछ अच्छा हो जाएगा

इमरान शमशाद

जल कर जिस ने जल को देखा

इमरान शमशाद

इन मकानों से बहुत दूर बहुत दूर कहीं

इमरान शमशाद

हमारी मोहब्बत नुमू से निकल कर कली बन गई थी मगर थी नुमू में

इमरान शमशाद

ढूँडिए दिन रात हफ़्तों और महीनों के बटन

इमरान शमशाद

ख़ुदा तू इतनी भी महरूमियाँ न तारी रख

इमरान हुसैन आज़ाद

आसमाँ मिल न सका धरती पे आया न गया

इमरान हुसैन आज़ाद

इस लिए सब से अलग है मिरी ख़ुशबू 'आमी'

इमरान आमी

ज़ख़्म अब तक वही सीने में लिए फिरता हूँ

इमरान आमी

आख़िर इक दिन सब को मरना होता है

इमरान आमी

ख़ूब-ओ-ज़िश्त-ए-जहाँ का फ़र्क़ न पूछ

इम्दाद इमाम असर

मेरे सर में जो रात चक्कर था

इम्दाद इमाम असर

जफ़ाएँ होती हैं घुटता है दम ऐसा भी होता है

इम्दाद इमाम असर

ये क्या कहा मुझे ओ बद-ज़बाँ बहुत अच्छा

इमदाद अली बहर

क़द्र-दाँ कोई न असफ़ल है न आ'ला अपना

इमदाद अली बहर

ख़ुर्शीद फ़िराक़ में तपाँ है

इमदाद अली बहर

ख़ूब-रूयान-ए-जहाँ चाँद की तनवीरें हैं

इमदाद अली बहर

ख़ूब-रू सब हैं मगर हूरा-शमाइल एक है

इमदाद अली बहर

जल्वा-ए-अर्बाब-ए-दुनिया देखिए

इमदाद अली बहर

हमीं नाशाद नज़र आते हैं दिल-शाद हैं सब

इमदाद अली बहर

गया सब अंदोह अपने दिल का थमे अब आँसू क़रार आया

इमदाद अली बहर

चुनने न दिया एक मुझे लाख झड़े फूल

इमदाद अली बहर

जिस्म ऐसा घुल गया है मुझ मरीज़-ए-इश्क़ का

इमाम बख़्श नासिख़

दिल सियह है बाल हैं सब अपने पीरी में सफ़ेद

इमाम बख़्श नासिख़

कौन सा तन है कि मिस्ल-ए-रूह इस में तू नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

है मोहब्बत सब को उस के अबरू-ए-ख़मदार की

इमाम बख़्श नासिख़

शहर में ओले पड़े हैं सर सलामत है कहाँ

इमाम अाज़म

किसी की बात कोई बद-गुमाँ न समझेगा

इमाम अाज़म

समझाने वालों ने कितना उन को समझाया लोगो

इलियास इश्क़ी

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