यात्रा Poetry (page 29)

अलग हैं हम कि जुदा अपनी रह-गुज़र में हैं

सग़ीर मलाल

फिर रह-ए-इश्क़ वही ज़ाद-ए-सफ़र माँगे है

साग़र निज़ामी

हज़ार हम-सफ़रों में सफ़र अकेला है

साग़र मेहदी

दुम

साग़र ख़य्यामी

यहाँ क़याम से बेहतर है कूच कर जाना

सफ़दर सिद्दीक़ रज़ी

सूने ही रहे हिज्र के सहरा उसे कहना

सफ़दर सलीम सियाल

रस्तों पे न बैठो कि हवा तंग करेगी

सफ़दर सलीम सियाल

अपनी साँसें मिरी साँसों में मिला के रोना

सफ़दर सलीम सियाल

वो अंजुमन में रात अजब शान से गए

सईद राही

इतना तो हुआ ऐ दिल इक शख़्स के जाने से

सईद राही

कुछ लोग थे सफ़र में मगर हम-ज़बाँ न थे

सईद नक़वी

अपनी तलाश में निकले

सईद नक़वी

रस्ते लपेट कर सभी मंज़िल पे लाए हैं

सईद नक़वी

किया है ख़ुद ही गिराँ ज़ीस्त का सफ़र मैं ने

सईद नक़वी

चाहे हमारा ज़िक्र किसी भी ज़बाँ में हो

सईद नक़वी

बे-सबब ठीक नहीं घर से निकल कर जाना

सईद आरिफ़ी

ज़ात की काल कोठरी से आख़िरी नश्रिया

सईद अहमद

निस्फ़ हिज्र के दयार से

सईद अहमद

हम ज़ात से हम कलामी और फ़िराक़

सईद अहमद

डूबते सूरज की सरगोशी

सईद अहमद

अधूरी नस्ल का पूरा सच

सईद अहमद

खुलता है यूँ हवा का दरीचा समझ लिया

सईद अहमद

यूँ तो हर एक शख़्स ही तालिब समर का है

सादिक़ नसीम

वो जिस का रंग सलोना है बादलों की तरह

सादिक़ नसीम

वो चीर के आकाश ज़मीं पर उतर आया

सादिक़

पलंग पर जो किताब ओ सिनान रख देगा

सादिक़

रास्ते फैले हुए जितने भी थे पत्थर के थे

सदफ़ जाफ़री

कैसे सच से रहे बे-ख़बर आइना

सचिन शालिनी

रात को ख़्वाब हो गई दिन को ख़याल हो गई

साबिर ज़फ़र

मैं जिस के साथ 'ज़फ़र' उम्र भर उठा बैठा

साबिर ज़फ़र

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