यात्रा Poetry (page 31)

और अभी तेज़ दौड़ना है मुझे

रूही कंजाही

तुझ बिन रह-ए-हयात में लुत्फ़-ए-सफ़र कहाँ

रोहित सोनी ‘ताबिश’

गरचे मिरे ख़ुलूस से वो बे-ख़बर न था

रोहित सोनी ‘ताबिश’

मोहब्बत का सफ़र हे और मैं हूँ

रिज़वानूरर्ज़ा रिज़वान

दिल जो घबराया तो उठ कर दोस्तों में आ गया

रियाज़ साग़र

बनारस

रियाज़ लतीफ़

खींच कर ले जाएगा अंजान महवर की तरफ़

रियाज़ लतीफ़

जिस्मों की मेहराब में रहना पड़ता है

रियाज़ लतीफ़

हर एक ख़लिया को आईना घर बनाते हुए

रियाज़ लतीफ़

ये आलम-ए-वहशत है कि दहशत का असर है

रियासत अली ताज

मेरे अफ़्कार ने जिस शय से जिला पाई है

रियासत अली ताज

वही तवील सी राहें सफ़र वही तन्हा

ऋषि पटियालवी

शहर-ए-शोर-ओ-शर तन्हा घर के बाम-ओ-दर तन्हा

रिफ़अत सरोश

फिर फ़िक्र-ए-सुख़न मैं कर रहा हूँ

रिफ़अत सरोश

न फूल हूँ न सितारा हूँ और न शो'ला हूँ

रिफ़अत सरोश

न कोई दोस्त न दुश्मन अजीब दुनिया है

रिफ़अत सरोश

चाहतों का जो शजर है दोस्तो

रिफ़अत अल हुसैनी

निशान क़ाफ़ला-दर-क़ाफ़ला रहेगा मिरा

रियाज़ मजीद

मकान-ए-दिल से जो उठता था वो धुआँ भी गया

रियाज़ मजीद

ख़ुद में झाँका तो अजब मंज़र नज़र आया मुझे

रियाज़ मजीद

कौन से जज़्बात ले कर तेरे पास आया करूँ

रियाज़ मजीद

ख़ुदा से उसे माँग कर देखते हैं

रेनू नय्यर

ख़ुदा से उसे माँग कर देखते हैं

रेनू नय्यर

अंजाम-ए-इंतिहा-ए-सफ़र देखते चलें

रहबर जौनपूरी

नज़्ज़ारा-ए-जमाल ने सोने नहीं दिया

रेहाना रूही

मैं हूँ मेरी चश्म-ए-तर है रात है तंहाई है

राज़िक़ अंसारी

खुले में छोड़ रखा है मगर सलीक़े से

राज़िक़ अंसारी

ख़ुद-निगर थे और महव-ए-दीद-ए-हुस्न-ए-यार थे

रज़ी मुजतबा

हम रूह-ए-सफ़र हैं हमें नामों से न पहचान

राज़ी अख्तर शौक़

ख़ुश्बू हैं तो हर दौर को महकाएँगे हम लोग

राज़ी अख्तर शौक़

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