रात Poetry (page 26)

मौत का क्यूँ कर ए'तिबार आए

शाहिद इश्क़ी

महताब है न अक्स-ए-रुख़-ए-यार अब कोई

शाहिद इश्क़ी

कुछ अपनी बात कहो कुछ मिरी सुनो मत सो

शाहिद इश्क़ी

बाज़ार

शाहिद अख़्तर

सजाएँ महफ़िल-ए-याराँ न शग़्ल-ए-जाम करें

शाहिद अख़्तर

जब अपना मुक़द्दर ठहरे हैं ज़ख़्मों के गुलिस्ताँ और सही

शाहिद अख़्तर

यूँ देखने को देखते रहते हैं ख़्वाब लोग

शाहिद अहमद शोएब

वो बे-नियाज़ शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल गया

शाहिद अहमद शोएब

नक़दी कहाँ से आएगी

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

गुलाब-ब-कफ़

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

ज़िंदगी है मुख़्तसर आहिस्ता चल

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दिल जहाँ भी डूबा है उन की याद आई है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

ज़माना मेरी तबाही पे जो उदास हुआ

शाहीन बद्र

ग़ुंचा ग़ुंचा मौसम-ए-रंग-ए-अदा में क़ैद था

शाहीन बद्र

ख़्वाब खुलना है जो आँखों पे वो कब खुलता है

शाहीन अब्बास

हम रह गए हमारा ख़लल क्यूँ नहीं रहा

शाहीन अब्बास

ख़्वाब से दिल-लगी न कर लेना

शाहबाज़ रिज़्वी

मचलते रहते हैं बिस्तर पे ख़्वाब मेरे लिए

शहबाज़ नदीम ज़ियाई

दयार-ए-शाम न बुर्ज-ए-सहर में रौशन हूँ

शहबाज़ नदीम ज़ियाई

ज़िंदगी शब के जज़ीरों से उधर ढूँडते हैं

शहबाज़ ख़्वाजा

वो एक ख़्वाब कि आँखों में जगमगा रहा है

शहबाज़ ख़्वाजा

सो गया ओढ़ के फिर शब की क़बाएँ सूरज

शहबाज़ ख़्वाजा

मुश्किल तो न था ऐसा भी अफ़्लाक से रिश्ता

शहबाज़ ख़्वाजा

जब भी कश्ती के मुक़ाबिल भँवर आता है कोई

शहाब सफ़दर

तस्ख़ीर-ए-फ़ितरत के बअ'द

शहाब जाफ़री

सूरज का शहर

शहाब जाफ़री

मैं

शहाब जाफ़री

शाम रखती है बहुत दर्द से बेताब मुझे

शहाब जाफ़री

क़ैद-ए-इम्काँ से तमन्ना थी गमीं छूट गई

शहाब जाफ़री

हिज्र-ओ-विसाल-ए-यार का मौसम निकल गया

शहाब जाफ़री

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