मामला Poetry (page 14)

जब वो आली-दिमाग़ हँसता है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ ने चुटकी सी ली फिर आ के मेरी जाँ के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हमारी अक़्ल-ए-बे-तदबीर पर तदबीर हँसती है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देखने से तिरे जी पाता हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चमन में दहर के हर गुल है कान की सूरत

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बाग़ में तू कभू जो हँसता है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किस हक़ीक़त का इंकिशाफ़ किया

शहज़ाद नय्यर

जो कुछ भी मेरे पास थी दौलत निगल गई

शहज़ाद हुसैन साइल

कोेसा दूध

शहज़ाद हसन

वो कोई और है जिस ने तुझे चाहा होगा

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

जीने मरने के दरमियान एक साअत

शहज़ाद अहमद

ज़मीं अपने लहू से आश्ना होने ही वाली है

शहज़ाद अहमद

ये किस ग़म से अक़ीदत हो गई है

शहज़ाद अहमद

वो जा चुका है तो क्यूँ बे-क़रार इतने हो

शहज़ाद अहमद

उम्र जितनी भी कटी उस के भरोसे पे कटी

शहज़ाद अहमद

सब्त है चेहरों पे चुप बन में अंधेरा हो चुका

शहज़ाद अहमद

कहीं भी साया नहीं किस तरफ़ चले कोई

शहज़ाद अहमद

जो शजर सूख गया है वो हरा कैसे हो

शहज़ाद अहमद

जो दिल में खटकती है कभी कह भी सकोगे

शहज़ाद अहमद

जिस ने तिरी आँखों में शरारत नहीं देखी

शहज़ाद अहमद

इसी बाइस ज़माना हो गया है उस को घर बैठे

शहज़ाद अहमद

हिज्र की रात मिरी जाँ पे बनी हो जैसे

शहज़ाद अहमद

फ़स्ल-ए-गुल ख़ाक हुई जब तो सदा दी तू ने

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

अब निभानी ही पड़ेगी दोस्ती जैसी भी है

शहज़ाद अहमद

अब जी के बहलने की है एक यही सूरत

शहरयार

वो मोड़

शहरयार

मेरी ज़मीं

शहरयार

ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से

शहरयार

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