मामला Poetry (page 45)

साफ़ बातों से हो गया मा'लूम

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

लुट रही है दौलत-ए-दीदार क़ैसर-बाग़ में

अरशद अली ख़ान क़लक़

जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर

अरशद अली ख़ान क़लक़

हम तो हों दिल से दूर रहें पास और लोग

अरशद अली ख़ान क़लक़

गुलों पर साफ़ धोका हो गया रंगीं कटोरी का

अरशद अली ख़ान क़लक़

बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को

अरशद अली ख़ान क़लक़

बशर के फ़ैज़-ए-सोहबत से लियाक़त आ ही जाती है

अरशद अली ख़ान क़लक़

आशिक़-ए-गेसू-ओ-क़द तेरे गुनहगार हैं सब

अरशद अली ख़ान क़लक़

मुझ को तक़दीर ने यूँ बे-सर-ओ-आसार किया

अरशद अब्दुल हमीद

हिना-रंग हाथों में

अरमान नज्मी

घनी आबादियों की बे-अमानी का तमाशा कर

अरमान नज्मी

वो क्या मस्लहत थी

आरिफ़ा शहज़ाद

दोज़ख़ भी क्या गुमान है जन्नत भी है फ़रेब

आरिफ़ शफ़ीक़

शायरी मुझ को अजब हाल में ले जाती है

आरिफ़ इमाम

अपने अहबाब को अशआ'र सुनाने निकला

आरिफ़ अंसारी

तिरे बाज़ूओं का सहारा तो ले लूँ मगर उन में भी रच गई है थकन

आरिफ़ अब्दुल मतीन

तिरे बाज़ुओं का सहारा तो ले लूँ मगर इन में भी रच गई है थकन

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मैं जिस को राह दिखाऊँ वही हटाए मुझे

आरिफ़ अब्दुल मतीन

कितनी हसरत से तिरी आँख का बादल बरसा

आरिफ़ अब्दुल मतीन

ढूँढता हूँ सर-ए-सहरा-ए-तमन्ना ख़ुद को

आरिफ़ अब्दुल मतीन

तमन्नाएँ जवाँ थीं इश्क़ फ़रमाने से पहले

अक़ील नोमानी

आना भी आने वाले का अफ़्साना हो गया

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

तिरे होते जो जचती ही नहीं थी

अनवर शऊर

ये तन्हाई ये उज़्लत ऐ दिल ऐ दिल

अनवर शऊर

उन की सूरत हमें आई थी पसंद आँखों से

अनवर शऊर

'शुऊर' वक़्त पे दिल की दवा हुई होती

अनवर शऊर

न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात गो अकेला मैं

अनवर शऊर

अपने दिल की आदत है शहज़ादों वाली

अनवर सदीद

इश्क़ में ग़म के सिवा कोई ख़ुशी देखी नहीं

अनवर साबरी

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