मामला Poetry (page 44)

हर लम्हा चाँद चाँद निखरना पड़ा मुझे

अाशा प्रभात

ज़िंदगी मौत का आईना

असग़र नदीम सय्यद

इक उम्र मह-ओ-साल की ठोकर में रहा हूँ

असग़र गोरखपुरी

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

असग़र गोंडवी

ज़ौक़-ए-सरमस्ती को महव-ए-रू-ए-जानाँ कर दिया

असग़र गोंडवी

शिकवा न चाहिए कि तक़ाज़ा न चाहिए

असग़र गोंडवी

सामने उन के तड़प कर इस तरह फ़रियाद की

असग़र गोंडवी

पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए

असग़र गोंडवी

मस्ती में फ़रोग़-ए-रुख़-ए-जानाँ नहीं देखा

असग़र गोंडवी

एक ऐसी भी तजल्ली आज मय-ख़ाने में है

असग़र गोंडवी

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

असग़र गोंडवी

कुछ भी कहो सब अपनी अनाओं पे अड़े हैं

असग़र आबिद

शश्दर-ओ-हैरान है जो भी ख़रीदारों में है

असद जाफ़री

सच बोल के बचने की रिवायत नहीं कोई

असअ'द बदायुनी

रास्ता कोई सफ़र कोई मसाफ़त कोई

असअ'द बदायुनी

यही इक निबाह की शक्ल है वो जफ़ा करें मैं वफ़ा करूँ

आरज़ू लखनवी

वो क्या लिखता जिसे इंकार करते भी हिजाब आया

आरज़ू लखनवी

वअ'दा सच्चा है कि झूटा मुझे मालूम न था

आरज़ू लखनवी

क्यूँ किसी रह-रौ से पूछूँ अपनी मंज़िल का पता

आरज़ू लखनवी

कहीं सर पटकते दीवाने कहीं पर झुलसते परवाने

आरज़ू लखनवी

वीराँ वीराँ बाम-ओ-दर मैं और मिरी तन्हाई

अरशदुल क़ादरी

कोई तो मोजज़ा ऐसा भी हो अपनी मोहब्बत में

अरशद लतीफ़

कोई नहीं है इंतिज़ार सुब्ह-ए-विसाल के सिवा

अरशद लतीफ़

किसी सूरत अगर इज़हार की सूरत निकल आए

अरशद लतीफ़

एक सूरत तिरी बनाने में

अरशद लतीफ़

दर्द की साकित नदी फिर से रवाँ होने को है

अरशद कमाल

किश्त-ए-एहसास में थोड़ा सा मिला लेंगे तुझे

अरशद जमाल 'सारिम'

दो-चार सितारे ही मिरी आँख में धर जा

अरशद जमाल 'सारिम'

हम तो न घर में आप के दम-भर ठहरने आएँ

अरशद अली ख़ान क़लक़

यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

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