तकदीर Poetry (page 12)

शादी ओ अलम सब से हासिल है सुबुकदोशी

बेदम शाह वारसी

क़स्र-ए-जानाँ तक रसाई हो किसी तदबीर से

बेदम शाह वारसी

ख़ंजर तलाश करता है

बेबाक भोजपुरी

राज़ है इबरत-असर फ़ितरत की हर तहरीर का

बेबाक भोजपुरी

ले के दिल उस शोख़ ने इक दाग़ सीने पर दिया

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

हर तरफ़ सोज़ का अंदाज़ जुदागाना है

बासित भोपाली

शो'ला-ए-गुल गुलाब शो'ला क्या

बशीर बद्र

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

बशीर बद्र

दौलत नहीं काम आती जो तक़दीर बुरी हो

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

क़मर की वो ख़ुर्शीद तस्वीर है

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

दिल जो सूरत-गर-ए-मअ'नी का सनम-ख़ाना बने

बर्क़ देहलवी

वो नज़र आईना-फ़ितरत ही सही

बाक़ी सिद्दीक़ी

इश्क़ ने मंसब लिखे जिस दिन मिरी तक़दीर में

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

क़ज़ा ने हाल-ए-गुल जब सफ़्हा-ए-तक़दीर पर लिक्खा

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

बहस क्यूँ है काफ़िर-ओ-दीं-दार की

बहराम जी

है दिल को जो याद आई फ़लक-ए-पीर किसी की

ज़फ़र

चराग़ों में अँधेरा है अँधेरे में उजाले हैं

बद्र वास्ती

तीरगी में सुब्ह की तनवीर बन जाएँगे हम

अज़्म शाकरी

तुम मोहब्बत का उसे नाम भी दे लो लेकिन

अज़लान शाह

दूसरा रुख़ नहीं जिस का उसी तस्वीर का है

अज़लान शाह

मिरी तक़दीर से पहले सँवरना जिन का मुश्किल है

अज़ीज़ वारसी

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ

अज़ीज़ वारसी

आख़िर-ए-शब वो तेरी अंगड़ाई

अज़ीज़ वारसी

एक ही शहर में रहते बस्ते काले कोसों दूर रहा

अज़ीज़ हामिद मदनी

हर इक फ़नकार ने जो कुछ भी लिक्खा ख़ूब-तर लिक्खा

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

जी रहा हूँ मैं उदासी भरी तस्वीर के साथ

अज़हर नैयर

ये कम नहीं के वही शाम का सितारा है

अज़हर हाश्मी

ख़ामोश ज़बाँ से जब तक़रीर निकलती है

अज़हर हाश्मी

कोई भी शक्ल मिरे दिल में उतर सकती है

अज़हर फ़राग़

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