तस्वीर Poetry (page 4)

आज अचानक फिर ये कैसी ख़ुशबू फैली यादों की

उनवान चिश्ती

दाएँ बाज़ू में गड़ा तीर नहीं खींच सका

उमैर नजमी

ख़ुद को हर रोज़ इम्तिहान में रख

उमैर मंज़र

एक तस्वीर बनाई है ख़यालों ने अभी

त्रिपुरारि

जाने फिर उस के दिल में क्या बात आ गई थी

त्रिपुरारि

तस्वीर-ए-रहमत

तिलोकचंद महरूम

देखने वाली अगर आँख को पहचान सकें

तौसीफ़ तबस्सुम

तुम अच्छे थे तुम को रुस्वा हम ने किया

तौसीफ़ तबस्सुम

कितने ही तीर ख़म-ए-दस्त-ओ-कमाँ में होंगे

तौसीफ़ तबस्सुम

काश इक शब के लिए ख़ुद को मयस्सर हो जाएँ

तौसीफ़ तबस्सुम

कोई तासीर तो है इस की नवा में ऐसी

तौक़ीर तक़ी

एक सन्नाटा सा तक़रीर में रक्खा गया था

तसनीम आबिदी

तुम ग़ैर से मिलो न मिलो मैं तो छोड़ दूँ

मीर तस्कीन देहलवी

कोई शिकवा न शिकायत न वज़ाहत कोई

तारिक़ क़मर

जितने अल्फ़ाज़ हैं सब कहे जा चुके

तारिक़ क़मर

पाँव जब हो गए पत्थर तो सदा दी उस ने

तारिक़ क़मर

ख़ुश्क आँखों से कहाँ तय ये मसाफ़त होगी

तारिक़ क़मर

एक तस्वीर जलानी है अभी

तारिक़ क़मर

ऐसी तक़्सीम की सूरत निकल आई घर में

तारिक़ नईम

आज किस ख़्वाब की ताबीर नज़र आई है

तारिक़ नईम

दश्त में जो भी है जैसा मिरा देखा हुआ है

तनवीर सामानी

मैं रख देती हूँ तुम्हारा नाम फ़ोटोग्राफ़र

तनवीर अंजुम

ख़्वाब तो ख़्वाब है ता'बीर बदल जाती है

तनवीर अहमद अल्वी

ख़्वाब और हक़ीक़त की तस्वीर नज़र आई

तालिब चकवाली

इश्क़ क्यूँ रुस्वा हुआ अपना सर-ए-राहे गाहे

तल्हा रिज़वी बारक़

तुम कोई इस से तवक़्क़ो' न लगाना मरे दोस्त

तैमूर हसन

जब उस की तस्वीर बनाया करता था

तहज़ीब हाफ़ी

शायरों का जब्र

ताबिश कमाल

कहीं से तुम मुझे आवाज़ देती हो

ताबिश कमाल

दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

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