समय Poetry (page 29)

हम भी उसी के साथ गए होश से 'सईद'

सईद अहमद

ज़ात की काल कोठरी से आख़िरी नश्रिया

सईद अहमद

निस्फ़ हिज्र के दयार से

सईद अहमद

वही ख़राबा-ए-इम्काँ वही सिफ़ाल-ए-क़दीम

सईद अहमद

शोरिश-ए-वक़्त हुई वक़्त की रफ़्तार में गुम

सईद अहमद

होने की इक झलक सी दिखा कर चला गया

सईद अहमद

हैरत-ए-पैहम हुए ख़्वाब से मेहमाँ तिरे

सईद अहमद

ज़िंदगी ग़म के अंधेरों में सँवरने से रही

सादिक़ इंदौरी

ये क्या हुआ कि हर इक रस्म-ओ-राह तोड़ गए

सादिक़ इंदौरी

फ़र्जाम

सादिक़

एक वसिय्यत

सादिक़

फिर से लहू लहू दर-ओ-दीवार देख ले

सादिक़

यूँ तो इक उम्र साथ साथ हुई

सदा अम्बालवी

तबीअत रफ़्ता रफ़्ता ख़ूगर-ए-ग़म होती जाती है

सदा अम्बालवी

न ज़िक्र गुल का कहीं है न माहताब का है

सदा अम्बालवी

हर एक मरहला-ए-दर्द से गुज़र भी गया

साबिर ज़फ़र

ये महर ओ मह बे-चराग़ ऐसे कि राख बन कर बिखर रहे हैं

साबिर वसीम

आज की रात

साबिर दत्त

तुझे तलाश है जिस की गुज़र गया कब का

साबिर अदीब

मैं दरिया हूँ मगर दोनों तरफ़ साहिल है तन्हाई

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

तुझ से दूरी और क़यामत लगती है

सबा नुसरत

शाख़ों पर जब पत्ते हिलने लगते हैं

सबा नुसरत

हम ने ख़ाक-ए-दर-ए-महबूब जो चेहरे पे मली

सबा जायसी

बू-ए-ख़ुश की तरह हर सम्त बिखर जाऊँगा

सबा जायसी

क़तरा क़तरा तिश्नगी

सबा इकराम

इन पत्थरों के शहर में दिल का गुज़र कहाँ

सबा इकराम

उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं

सबा अकबराबादी

वक़्त तो वक़्त है रुकता नहीं इक पल के लिए

सादुल्लाह शाह

मौत इक दरिंदा है ज़िंदगी बला सी है

सादुल्लाह शाह

मुंसिफ़-वक़्त से बेगाना गुज़रना होगा

रूही कंजाही

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