धरती Poetry (page 5)

हवा पे चल रहा है चाँद राह-वार की तरह

शाहिदा हसन

बिन माँगे मिल रहा हो तो ख़्वाहिश फ़ुज़ूल है

शाहिद ज़की

शिकस्ता जिस्म दरीदा जबीन की जानिब

शाहिद कमाल

जो इस ज़मीन पे रहते थे आसमान से लोग

शाहिद कमाल

लहू का दाग़ न था ज़ख़्म का निशान न था

शाहिद कलीम

दम अजनबी सदाओं का भरते हो साहिबो

शाहिद अहमद शोएब

इब्तिदा सा कुछ इंतिहा सा कुछ

शाहीन अब्बास

गुज़रे नहीं और गुज़र गए हम

शाहीन अब्बास

ऐसा नहीं कि उस ने बनाया नहीं मुझे

शाहीन अब्बास

आँखों से यूँ चराग़ों में डाली है रौशनी

शाहीन अब्बास

सदा-ए-मुज़्दा-ए-ला-तक़नतू के धारे पर

शहबाज़ ख़्वाजा

हयात में भी अजल का समाँ दिखाई दे

शहाब जाफ़री

सरज़मीन-ए-ज़ुल्फ़ में क्या दिल ठिकाने लग गया

शाह नसीर

कुछ सरगुज़िश्त कह न सके रू-ब-रू क़लम

शाह नसीर

फ़ुर्सत एक दम की है जूँ हबाब पानी याँ

शाह नसीर

बदन-दरीदा-ओ-बे-बर्ग-ओ-बार होना भी

शाह हुसैन नहरी

हम ज़मीन-ज़ादों को आसमाँ बना जाना

शफ़ीक़ सलीमी

अब ज़मीन-ओ-आसमाँ के सब किनारों से अलग

शादाब उल्फ़त

ख़ुदा ही उस चुप की दाद देगा कि तुर्बतें रौंदे डालते हैं

शाद लखनवी

ता-उम्र आश्ना न हुआ दिल गुनाह का

शाद अज़ीमाबादी

हज़ार हैफ़ छुटा साथ हम-नशीनों का

शाद अज़ीमाबादी

किसी की मुंतज़िर अब दिल की रह-गुज़ार नहीं

शबनम वहीद

नज़्म

शबनम अशाई

लहू पुकार के चुप है ज़मीन बोलती है

सीन शीन आलम

गौतम-बुद्ध

सीमाब अकबराबादी

सूरज की तपती धूप ने मारा है इन दिनों

सीमा शर्मा मेरठी

मेरे ख़तों को जलाने से कुछ नहीं होगा

सीमा शर्मा मेरठी

अब्र ही अब्र है बरसता नईं

सीमा नक़वी

बहार-ए-बाग़ हो मीना हो जाम-ए-सहबा हो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कहाँ कहाँ से निगह उस को ढूँड लाए है

सत्य नन्द जावा

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